Ticker

6/recent/ticker-posts

अवैध ईंट-भट्ठों की मनमानी: कृषि भूमि की मिट्टी से लेकर बाल श्रम तक, हर नियम की खुलेआम उड़ाई जा रही धज्जियां


कोरिया।  ग्राम पंचायत खांडा क्षेत्र में संचालित ईंट-भट्ठों पर नियम-कानून पूरी तरह से बेमानी साबित हो रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार यहां कृषि भूमि की उपजाऊ मिट्टी का अवैध उपयोग, शासकीय जमीन से मिट्टी की चोरी, प्रदूषण नियंत्रण नियमों की अनदेखी और श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन धड़ल्ले से किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि खेतों की ऊपरी उपजाऊ परत (टॉप सॉयल) को निकालकर ईंट निर्माण में उपयोग किया जा रहा है। इससे किसानों की जमीन बंजर होती जा रही है और भविष्य में कृषि उत्पादन पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर शासकीय भूमि, चारागाह और तालाब किनारे से मिट्टी निकालने की भी शिकायतें सामने आई हैं, जो सीधे-सीधे खनिज अधिनियम और राजस्व नियमों का उल्लंघन है।

भट्ठा संचालन में जिग-जैग तकनीक का पालन अनिवार्य होने के बावजूद अधिकांश भट्ठे आज भी पुरानी सीधी लाइन पद्धति से चलाए जा रहे हैं। इसके कारण भारी मात्रा में धुआं निकलता है, जिससे वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय चोरी-छिपे भट्ठे जलाए जाते हैं, ताकि प्रशासन की नजर से बचा जा सके। इसका सीधा असर आसपास के गांवों, बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। पर्यावरण नियमों के तहत प्रत्येक ईंट-भट्ठा संचालक को प्रतिवर्ष कम से कम 200 पौधे लगाना अनिवार्य है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि एक भी पौधा नहीं लगाया जाता। न कोई हरित पट्टी विकसित की गई है और न ही प्रदूषण नियंत्रण के अन्य उपाय अपनाए गए हैं। इससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और गांवों में धूल, राख व धुएं का स्थायी संकट बना हुआ है। श्रम कानूनों की स्थिति और भी चिंताजनक है। बाल श्रम पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद भट्ठों पर नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, वयस्क श्रमिकों को भी न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अनुसार भुगतान नहीं किया जा रहा। मजदूरों के लिए पीने का साफ पानी, शौचालय, प्राथमिक उपचार और रहने की उचित व्यवस्था जैसे बुनियादी अधिकार भी नदारद हैं। इससे श्रमिकों का शोषण खुलेआम हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद खनिज विभाग, श्रम विभाग और पर्यावरण विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि कहीं न कहीं “मलाई-मिठाई” का खेल चल रहा है, जिसके चलते अवैध भट्ठों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में ईमानदार है, तो संयुक्त जांच कर अवैध भट्ठों को तत्काल सील किया जाए। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध मिट्टी उत्खनन, बाल श्रम, प्रदूषण और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के मामलों में दोषी भट्ठा संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए नियमित निगरानी तंत्र विकसित किया जाए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ