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मुख्यमंत्री की पत्नी को फॉलो गार्ड देना नियम विरुद्ध, बैकुंठपुर में प्रोटोकॉल उल्लंघन पर उठे सवाल

बैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की पत्नी श्रीमती के हालिया बैकुंठपुर दौरे को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकारी के अनुसार, श्रीमती साय किसी कार्यक्रम में शामिल होने बैकुंठपुर आई थीं, जहां उन्हें फॉलो गार्ड (प्रोटोकॉल सुविधा) दिया गया। जानकारों का कहना है कि यह सुविधा छत्तीसगढ़ शासन के प्रोटोकॉल नियमों के स्पष्ट विरुद्ध है, क्योंकि मुख्यमंत्री की पत्नी किसी संवैधानिक अथवा वैधानिक पद पर आसीन नहीं हैं। यहां विपक्षी दल ने प्रोटोकॉल को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की।

क्या कहते हैं नियम

छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी प्रोटोकॉल नियमावली के अनुसार फॉलो कार्ड, सुरक्षा कवर, शासकीय वाहन, शासकीय विश्राम गृह में आरक्षण जैसी सुविधाएं केवल

संवैधानिक पदधारकों

मंत्रियों, सांसद, विधायक,राज्य द्वारा अधिसूचित पदों पर आसीन व्यक्तियों, को ही दी जा सकती हैं।

मुख्यमंत्री, राज्यपाल या अन्य पदाधिकारियों के परिजन, यदि किसी शासकीय/संवैधानिक पद पर नहीं हैं, तो उन्हें स्वतः प्रोटोकॉल या फॉलो कार्ड देने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में मुख्यमंत्री की पत्नी को फॉलो कार्ड दिया जाना नियम 3, 6 एवं 9 (छत्तीसगढ़ प्रोटोकॉल नियम) का उल्लंघन माना जा रहा है।

नेताओं की भीड़ और स्वागत पर सवाल

बताया जा रहा है कि श्रीमती साय के आगमन पर कई नेता और पदाधिकारी उनसे मिलने पहुंचे। गुलदस्ता लेकर स्वागत किया गया, विश्राम गृह में मुलाकातें हुईं और राजनीतिक सक्रियता असामान्य रूप से नजर आई। खास बात यह रही कि तरगवां सहकारी समिति से जुड़े वे नेता भी पहुंचे, जिन्हें माननीय हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कार्यवाहक अध्यक्ष पद से हटाया गया था। अब वही नेता पहली बार बैकुंठपुर विश्राम गृह पहुंचकर मुख्यमंत्री की पत्नी का स्वागत करते नजर आए।

कार्यवाहक अध्यक्ष बनाने की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, तरगवां सहकारी समिति में एक बार फिर कार्यवाहक अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर अंदरखाने तैयारी चल रही है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री की पत्नी के प्रभाव से किसी खास व्यक्ति को यह जिम्मेदारी दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। श्री जायसवाल द्वारा यह कहे जाने की भी चर्चा है कि उन्हें कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए जाने का आश्वासन मिला है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

प्रशासन की भूमिका पर प्रश्न

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन की निष्पक्षता और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आम नागरिक या किसी अन्य नेता की पत्नी होती, तो क्या उन्हें भी फॉलो कार्ड, विश्राम गृह और विशेष स्वागत मिलता? जानकारों का मानना है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए, चाहे व्यक्ति सत्ता में हो या सत्ता के करीब।

विपक्ष और जनचर्चा

मामले को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यह घटना सत्ता के दुरुपयोग और प्रभाव के गलत इस्तेमाल का उदाहरण है। यदि ऐसे मामलों पर समय रहते रोक नहीं लगी, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की साख पर बड़ा सवाल बन सकता है। फिलहाल बैकुंठपुर की यह घटना पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस प्रोटोकॉल उल्लंघन पर क्या रुख अपनाता है और क्या भविष्य में ऐसे मामलों पर कोई स्पष्ट कार्रवाई होती है या नहीं।

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