कोरिया। जिला खनिज न्यास संस्था (डीएमएफ) की करोड़ों रुपये की राशि के उपयोग को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर खनिज न्यास की राशि का खुलेआम बंदरबांट किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। इसी कड़ी में ग्राम पंचायत ओडगी का मामला सामने आया है, जहां सचिव मनोज साहू का स्थानांतरण आदेश 03 नवम्बर 2025 को जारी हो चुका है, लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी उन्होंने नवीन पदस्थापना स्थल पर पदभार ग्रहण नहीं किया है।
सूत्रों के अनुसार, ग्राम पंचायत ओडगी में खनिज न्यास की लाखों रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी। आरोप है कि इस राशि के वितरण और कार्य आबंटन में कथित कमीशन की भूमिका अहम रही है। कमीशन की इसी “मिठास” के चलते स्थानांतरण आदेश के बावजूद सचिव को पुराने पंचायत में ही बनाए रखा गया है। बताया जा रहा है कि विकास कार्यों की आड़ में खनिज न्यास की राशि को चहेतों के बीच बांट दिया गया, जिससे शासन के नियमों और दिशा-निर्देशों की खुली अवहेलना हुई है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जनपद स्तर के प्रभारी अधिकारी भी इस मामले में चाहकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। दबाव और कथित मिलीभगत के चलते स्थानांतरण नीति को ठेंगा दिखाया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि समय पर सचिव का स्थानांतरण लागू हो जाता, तो खनिज न्यास की राशि के उपयोग पर निष्पक्ष निगरानी संभव हो पाती। यह पहला मामला नहीं है जब जिले में स्थानांतरण आदेशों की अनदेखी हुई हो। इससे पहले भी कई कर्मचारियों के स्थानांतरण हुए, लेकिन महीनों तक उन्हें पुराने पद पर बनाए रखा गया। सवाल यह है कि आखिर ग्राम पंचायत सचिवों में ऐसा क्या प्रभाव है कि शासन के स्पष्ट आदेश भी बेअसर साबित हो रहे हैं। अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए, खनिज न्यास की राशि के उपयोग का ऑडिट हो और स्थानांतरण नीति का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि जनता का भरोसा बहाल हो सके।

0 टिप्पणियाँ