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बर्खास्त सहायक प्रबंधक का समिति में दख़ल जारी, जिला प्रशासन व सहकारिता विभाग को खुली चुनौती!


कोरिया। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, धौराटिकरा में सहकारिता अधिनियम एवं कर्मचारी सेवा नियमों की खुली अवहेलना का गंभीर मामला सामने आया है। समिति से विधिवत बर्खास्त किए जा चुके पूर्व सहायक प्रबंधक अजय साहू द्वारा आज भी कथित रूप से समिति के कार्यों में अनाधिकृत हस्तक्षेप किया जा रहा है, जिससे न केवल प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना हो रही है बल्कि पूरी सहकारिता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, संबंधित व्यक्ति को जिला प्रशासन एवं सहकारिता विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी सेवा नियमों के अंतर्गत सेवा से पृथक (बर्खास्त) किया जा चुका है। इसके बावजूद बर्खास्त कर्मचारी द्वारा स्वयं को समिति का कर्मचारी बताकर समिति परिसर में कार्य करना, दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना एवं निर्णयों में दखल देना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। किसके आदेश से कर रहे हैं कार्य?

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि—

जब संबंधित व्यक्ति को सेवा नियमों के तहत पूर्व में ही बर्खास्त किया जा चुका है, तो वह किस अधिकार और किस अधिकारी के आदेश से समिति के कार्यों में हस्तक्षेप कर रहा है? क्या यह सब बिना किसी विभागीय संरक्षण या सांठगांठ के संभव है? नियम व कानून क्या कहते हैं?- छत्तीसगढ़ सहकारिता अधिनियम, 1960 की धारा 55 एवं 57 के अनुसार, बर्खास्त अथवा सेवा से पृथक व्यक्ति को समिति के कार्यों में भाग लेने, निर्णय करने अथवा दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने का कोई अधिकार नहीं है। वहीं, छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी सेवा नियम, 2014 के अनुसार— सेवा समाप्ति के पश्चात कर्मचारी का सभी अधिकार तत्काल समाप्त हो जाते हैं। बर्खास्त व्यक्ति द्वारा शासकीय/अर्धशासकीय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना कूटरचना एवं धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।

इसके अतिरिक्त, भारतीय दंड संहिता (IPC) की

धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग), धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 468/471 (जालसाजी व फर्जी दस्तावेज का उपयोग) के अंतर्गत भी अपराध बनता है। प्रभार व अभिलेख अब तक नहीं सौंपे गए-सूत्रों के अनुसार, बर्खास्तगी के बावजूद आज दिनांक तक—

समिति का समस्त रिकार्ड,

दैनिक नगदी (Daily Cash), खाद एवं बीज का भौतिक स्टॉक, तथा समिति का विधिवत प्रभार, वर्तमान वैधानिक प्रबंधक को नहीं सौंपा गया है। इससे समिति के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन की भूमिका पर उठते सवाल स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि— क्या कुछ विभागीय अधिकारी बर्खास्त कर्मचारी को अप्रत्यक्ष संरक्षण दे रहे हैं? या फिर यह मामला जिला प्रशासन के आदेशों की खुली अवहेलना का उदाहरण है? अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन एवं सहकारिता विभाग इस गंभीर प्रकरण में तत्काल जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। यह प्रकरण केवल एक समिति तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी सहकारिता व्यवस्था की पारदर्शिता, कानूनसम्मत कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अधिकार पर सीधा प्रश्नचिह्न है।

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