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कटकोना में 15वें वित्त की राशि में दोहरा भुगतान, स्थानांतरण नीति की खुली अवहेलना



कोरिया/बैकुंठपुर। ग्राम पंचायत कटकोना में 15वें वित्त आयोग की राशि के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। आमजनों की सुविधा के लिए जारी की गई राशि को कथित तौर पर एक ही कार्य के लिए दो अलग-अलग फर्मों को भुगतान कर बंदरबांट किया गया। यह पूरा मामला ग्राम पंचायत सचिव गणेश राजवाड़े के कार्यकाल से जुड़ा है, जिनका स्थानांतरण 03 नवंबर 2025 को हो चुका था। स्थानांतरण के बावजूद लगभग डेढ़ माह बाद भी उनके द्वारा लाखों रुपये के वित्तीय लेन-देन किए जाने के आरोप हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन एवं भारत सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में वीडियो/डिजिटल सुविधा सहित बुनियादी कार्यों के लिए 15वें वित्त आयोग की राशि जारी की गई थी। इस राशि से ग्राम पंचायत कटकोना में एक कार्य पहले ही कराया जा चुका था, इसके बावजूद उसी कार्य के लिए दो अलग-अलग फर्मों को भुगतान किया गया। भुगतान की राशि लाखों रुपये में बताई जा रही है। सवाल यह है कि जब कार्य एक ही था, तो दूसरा भुगतान किस आधार पर किया गया?
सबसे गंभीर पहलू यह है कि स्थानांतरण नीति के तहत स्थानांतरित कर्मचारी को वित्तीय अधिकार (Financial Power) नहीं रहती। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) एवं पंचायत विभाग के नियमों के अनुसार, स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद संबंधित अधिकारी/कर्मचारी को न तो भुगतान करने का अधिकार होता है और न ही किसी प्रकार का वित्तीय निर्णय लेने का। इसके बावजूद ग्राम पंचायत कटकोना में स्थानांतरण के बाद भी भुगतान किए गए, जो सीधे-सीधे नियमों की अवहेलना है।
कौन-कौन से नियमों का उल्लंघन?
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 – अधिनियम की भावना के अनुसार पंचायत निधि का उपयोग केवल स्वीकृत कार्यों एवं विधिसम्मत प्रक्रिया से ही किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ वित्तीय संहिता (C.G. Financial Code) – बिना वैध अधिकार एवं स्वीकृति के शासकीय राशि का भुगतान करना वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।
स्थानांतरण नीति/आदेश – स्थानांतरण के बाद किसी भी प्रकार का वित्तीय लेन-देन करना प्रतिबंधित है।
भारतीय दंड संहिता (IPC) –
धारा 409: लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग।
धारा 420: धोखाधड़ी।
धारा 468/471: फर्जी दस्तावेज तैयार कर उपयोग करना (यदि बिल/मस्टर रोल/कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र में गड़बड़ी पाई जाती है)।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) – पद का दुरुपयोग कर शासकीय धन का लाभ पहुंचाना दंडनीय अपराध है।
जानबूझकर गलती करने पर क्या नियम?
यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि शासकीय कर्मचारी ने जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर वित्तीय अनियमितता की है, तो उसके विरुद्ध विभागीय जांच, निलंबन, वेतन वृद्धि रोकना, पदावनति, सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है। साथ ही आपराधिक प्रकरण दर्ज कर जेल एवं अर्थदंड का प्रावधान भी है। शासकीय धन की वसूली संबंधित अधिकारी/कर्मचारी से की जा सकती है।
जनपद पंचायत की भूमिका पर सवाल
खबरों के माध्यम से लगातार यह बताया जाता रहा कि स्थानांतरण नीति के तहत भुगतान नहीं हो सकता, इसके बावजूद बैकुंठपुर जनपद पंचायत अधिकारियों द्वारा संबंधित बैंक खाते में होल्ड नहीं लगाया गया। इससे यह संदेह गहराता है कि क्या उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल खेला गया। अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन, कलेक्टर एवं पंचायत विभाग द्वारा निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पंचायत स्तर पर शासकीय धन की लूट पर रोक लग सके और आम जनता की सुविधाओं के लिए आई राशि का सही उपयोग हो।

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