बैकुण्ठपुर। शहर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर गरीब, ठेला–गुमटी लगाने वाले और छोटे व्यापारियों पर त्वरित कार्रवाई कर उन्हें बेदखल किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शासकीय भूमि पर वर्षों से कब्जा जमाए बैठे रसूखदार लोगों पर प्रशासन मेहरबान नजर आ रहा है। यह स्थिति न केवल प्रशासन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि आम शहरवासियों में भी गहरी नाराजगी पैदा कर रही है।
प्रशासन द्वारा गुरुवार को पूरे शहर का भ्रमण कर अतिक्रमण का जायजा लिया गया, लेकिन कार्रवाई केवल चुनिंदा स्थानों तक ही सीमित रही। हाई स्कूल के पास, जहां मुख्यमंत्री के आगमन पर प्रस्तावित कोरिया महोत्सव होना है, वहां लगातार गुमटी और ठेलों को हटाया जा रहा है। वहीं बस स्टैंड परिसर, नजीराजार, पेट्रोल पंप क्षेत्र, फौव्हारा चौक, कुमार चौक, शहीद चौक सहित शहर के अन्य कई हिस्सों में वर्षों से स्थायी अतिक्रमण मौजूद है, जिस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। सबसे गंभीर मामला शहर के साथ लगी उस भूमि का है, जहां कब्जा न केवल शासकीय नियमों का उल्लंघन है बल्कि जिला जेल की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बताया जा रहा है। इसी क्षेत्र में महिला बंदी भी निवासरत हैं, इसके बावजूद वहां अवैध कब्जों पर प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। व्यापारियों और शहरवासियों का आरोप है कि जिन लोगों के पास पैसा, पद और मंत्री–विधायकों की पहुंच है, उन पर कार्रवाई करने से प्रशासन डरता है। ऐसे अतिक्रमणकर्ताओं के खिलाफ पूरे दस्तावेज उपलब्ध होने के बावजूद केवल प्रकरण दर्ज कर औपचारिकता निभाई जाती है और बाद में उसे बंद कर दिया जाता है। कई मामलों में तो आदेश पत्र तक गायब हो जाने की शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।
फौव्हारा क्षेत्र का चार मंजिला भवन इस दोहरे मापदंड का बड़ा उदाहरण बताया जा रहा है। शासकीय भूमि पर बने इस भवन को लेकर शिकायतें भी हुईं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसी तरह नगर पालिका क्षेत्र और कलेक्ट कार्यालय के आसपास अतिक्रमण की भरमार है, परंतु वहां भी राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई से बचा जा रहा है। शहरवासियों का सवाल है कि आखिर कानून केवल गरीबों के लिए ही क्यों सख्त है? क्या प्रशासन का दायित्व सभी के लिए समान नहीं होना चाहिए? यदि अतिक्रमण गलत है तो फिर कार्रवाई भी बिना भेदभाव के होनी चाहिए। लगातार हो रहे इस पक्षपातपूर्ण रवैये से आम जनता का प्रशासन पर से भरोसा टूटता जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और क्या वास्तव में शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने की निष्पक्ष पहल की जाती है या फिर गरीबों पर डंडा और रसूखदारों पर मेहरबानी का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।

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