कोरिया। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, धौराटिकरा द्वारा वर्ष 2020–21 एवं 2021–22 में गौ-पालन एवं डेयरी विकास योजनाओं के तहत किए गए लगभग दो करोड़ रुपये के फाइनेंस को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि देसी नस्ल गौ-पालन के नाम पर पूरे सरगुजा संभाग में सर्वाधिक फाइनेंस इसी समिति के माध्यम से किया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर न तो वास्तविक गौ-पालन दिखाई दे रहा है और न ही दुग्ध उत्पादन व ऋण वसूली की स्थिति स्पष्ट है।
सूत्रों के अनुसार, यह फाइनेंस राष्ट्रीय गोकुल मिशन, NABARD आधारित योजनाओं के अंतर्गत किया गया था। परंतु इसमें भारी वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर सहायक पंजीयक और सहकारिता विभाग के अधिकारियों की समिति प्रबंधन से कथित सांठ-गांठ के चलते निष्पक्ष जांच संभव नहीं हो पा रही है, जिस कारण अब अन्य जिले या स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग तेज हो गई है। जांच के प्रमुख बिंदुओं में यह सवाल शामिल हैं कि जिन लाभार्थियों को फाइनेंस दिया गया, उनके पास वास्तव में देसी नस्ल की गायें थीं या नहीं। क्या उनके पास गौ-पालन हेतु स्वयं की भूमि, शेड या वैध लीज/अनुमति पत्र उपलब्ध थे। इसके अलावा यह भी संदेह है कि चारा-पानी, रखरखाव और दूध उत्पादन की व्यवस्था वास्तव में थी या केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित रही। यह भी प्रश्न उठाया गया है कि दूध उत्पादन का भौतिक सत्यापन वास्तव में हुआ या नहीं। यदि हुआ, तो सत्यापन किस अधिकारी ने किया, प्रमाण-पत्र किसने जारी किए और क्या पंचनामा एवं गवाहों की उपस्थिति दर्ज की गई। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि फाइनेंस प्रति लीटर दूध उत्पादन के आधार पर तय किया गया था या नहीं, और यदि किया गया तो दर क्या थी।
नियमों के अनुसार प्रत्येक गाय का पशु बीमा और पशु चिकित्सक द्वारा मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य है। आरोप है कि कई मामलों में या तो बीमा पॉलिसियां अमान्य हैं या मेडिकल सर्टिफिकेट फर्जी अथवा दोहराए गए हैं। यह भी संदेह है कि पूरा फाइनेंस छत्तीसगढ़ सहकारी समितियां अधिनियम, NABARD गाइडलाइन और उपविधियों के अनुरूप नहीं किया गया। इतनी बड़ी राशि के फाइनेंस के बावजूद वर्तमान में वास्तविक गौ-पालन, दुग्ध उत्पादन और ऋण वसूली का अभाव इस पूरे प्रकरण को और संदिग्ध बनाता है। मांग की जा रही है कि स्थानीय सहायक पंजीयक को जांच से अलग रखते हुए अन्य जिले के सहकारिता अधिकारी, राज्य स्तर या NABARD, EOW-ACB जैसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषी पाए जाने पर कड़ी वैधानिक व आपराधिक कार्रवाई के साथ गबन की गई राशि की शीघ्र रिकवरी सुनिश्चित की जाए।

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