कोरिया। एक ओर जहां छत्तीसगढ़ शासन द्वारा “आवा पानी झोकी” जैसे जन-जागरूकता अभियान चलाकर जल संरक्षण, जल स्रोतों के संवर्धन और भू-जल स्तर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जिला कोरिया के पटना नगर पंचायत क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे स्थित एक पुराने निजी तालाब को पाट दिया जाना प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की खुली अनदेखी को उजागर करता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पटना नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित उक्त तालाब वर्षों पुराना था और स्थानीय क्षेत्र के जल संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। सूत्रों की मानें तो इस तालाब को पाटने की किसी भी प्रकार की अनुमति न तो नगर पंचायत से ली गई और न ही राजस्व या पर्यावरण विभाग से। इसके बावजूद तालाब को पूरी तरह मिट्टी और मलबे से भर दिया गया। सबसे गंभीर बात यह है कि यह कार्य नगर पंचायत पटना के एक जनप्रतिनिधि द्वारा कराया गया, जिनके संबंध एक मंत्री से बताए जा रहे हैं। यही कारण बताया जा रहा है कि न तो नगर पंचायत के मुख्य नगर पंचायत अधिकारी (CMO) ने समय रहते कोई रोक लगाई और न ही अब तक कोई कार्यवाही की गई। यदि यही कार्य कोई आम नागरिक करता, तो तत्काल नोटिस, जुर्माना और एफआईआर तक की कार्यवाही हो जाती।
नियम क्या कहते हैं? छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 172 एवं 247 के अनुसार किसी भी जल स्रोत की प्रकृति में परिवर्तन बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशानुसार किसी भी तालाब, नाला, जलाशय या प्राकृतिक जल स्रोत को पाटना पर्यावरण अपराध की श्रेणी में आता है। जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत जल स्रोतों को नष्ट करना दंडनीय अपराध है। छत्तीसगढ़ शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि शासकीय हो या निजी, किसी भी तालाब को बिना अनुमति पाटना अवैध है।
आम आदमी बनाम खास आदमी का कानून यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या कानून सबके लिए समान है? जहां आम नागरिक को नामांतरण जैसे छोटे से कार्य के लिए भी राजस्व और नगर पंचायत कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं, वहीं प्रभावशाली जनप्रतिनिधि नियमों को तोड़-मरोड़ कर जल स्रोत को ही खत्म कर देते हैं और प्रशासन मौन साधे रहता है।
आने वाली गर्मी में बढ़ेगा संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले ग्रीष्मकाल में अधिकांश क्षेत्रों में जल संकट गहराने वाला है, और पटना क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहेगा। ऐसे समय में जल स्रोत को समाप्त करना न केवल कानून के खिलाफ है बल्कि जनहित और पर्यावरण के भी विरुद्ध अपराध है।
कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—
तालाब पाटने के मामले की तत्काल जांच हो
दोषी जनप्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारियों पर कानूनी कार्यवाही की जाए। तालाब को पूर्व स्थिति में बहाल कराया जाए
अब देखना यह है कि “आवा पानी झोकी” अभियान केवल पोस्टर और भाषणों तक सीमित रहता है या फिर कानून का पालन प्रभावशाली लोगों पर भी समान रूप से लागू होता है।
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