कोरिया। जिले में आयोजित होने वाले बहुप्रतीक्षित कोरिया उत्सव को लेकर जिला प्रशासन पूरी तत्परता और समर्पण के साथ तैयारियों में जुटा हुआ है। कार्यक्रम में प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री सहित सांसद, मंत्री, विधायक एवं लगभग 30 जनप्रतिनिधियों के आगमन की संभावना है। जिला प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार सभी जनप्रतिनिधियों के स्वागत एवं प्रोटोकॉल व्यवस्था के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की विस्तृत ड्यूटी निर्धारित की गई है। कलेक्टर कोरिया एवं जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन में विभिन्न विभागों को जिम्मेदारियाँ सौंप दी गई हैं, जिससे कार्यक्रम सुव्यवस्थित, गरिमामय और सफल रूप से संपन्न हो सके। प्रशासनिक स्तर पर की जा रही तैयारियों की व्यापकता से स्पष्ट है कि जिला प्रशासन किसी भी प्रकार की कमी नहीं छोड़ना चाहता। आवास, सुरक्षा, मंच व्यवस्था, यातायात नियंत्रण, स्वास्थ्य सुविधाएं और प्रोटोकॉल जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन समयबद्ध और जिम्मेदारीपूर्वक करें, ताकि जिले की छवि राज्य स्तर पर सुदृढ़ हो।
इसी बीच एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। सोशल मीडिया के व्हाट्सएप ग्रुप “BR DCCB Koriya” में एक कथित ड्यूटी सूची वायरल हो गई, जिसमें वीवीआईपी व्यक्तियों के नाम एवं उनके स्वागत के लिए नियुक्त अधिकारियों-कर्मचारियों के नाम अंकित बताए जा रहे हैं। वायरल दस्तावेज में न तो कलेक्टर कोरिया के हस्ताक्षर दिखाई दे रहे हैं और न ही जावक पंजी क्रमांक अंकित है। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि यदि यह शासकीय दस्तावेज है, तो बिना विधिवत हस्ताक्षर एवं क्रमांक के यह सोशल मीडिया तक कैसे पहुंचा? और यदि अधिकृत दस्तावेज नहीं है, तो इसे किस उद्देश्य से प्रसारित किया गया? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह कौन अधिकारी या कर्मचारी है जिसने इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील दस्तावेज को सोशल मीडिया पर वायरल किया? यदि यह सूची अधिकृत रूप से जारी की गई थी, तो इसका इस प्रकार सार्वजनिक होना गंभीर प्रशासनिक चूक है। और यदि यह ड्राफ्ट अथवा आंतरिक दस्तावेज था, तो इसका लीक होना और भी चिंताजनक विषय है। ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस तरह की लापरवाही से न केवल सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, बल्कि शासन की छवि भी धूमिल होती है।
शासकीय दस्तावेजों का अनधिकृत प्रकाशन या प्रसारण गंभीर विषय माना जाता है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 420, 468 तथा आईटी एक्ट 2000 की धारा 66C, 66D के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान है। साथ ही, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत भी गोपनीय दस्तावेजों के लीक होने पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। जिले के जागरूक नागरिकों का भी मानना है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि दस्तावेज किस माध्यम से और किसकी जिम्मेदारी में बाहर आया। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उन पर त्वरित एवं कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल जिला प्रशासन कोरिया उत्सव को सफल बनाने में जुटा है। अब देखना यह होगा कि वायरल सूची मामले में जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।
वायरल सुचि की पुष्टी हम नही करते।

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