
कोरिया। लगातार प्रकाशित समाचारों का असर यह हुआ कि जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर के अधिकारी को मजबूरी में तलवापारा, भण्डारपारा और “कुबेर का खजाना” कहे जाने वाले ग्राम पंचायत कटकोना का प्रभार ग्राम सचिव गणेश राजवाडे को देना पड़ा। लेकिन बड़ी विडंबना यह रही कि स्थानांतरण के एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी संबंधित ग्राम सचिव अपने-अपने नवीन पंचायतों में पदभार ग्रहण नहीं कर रहे हैं। इसके बावजूद 15वें वित्त आयोग से ग्राम पंचायतों के विकास के लिए आई लाखों रुपये की राशि का खुलेआम दुरुपयोग और कथित बंदरबांट जारी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत कटकोना के ग्राम सचिव गणेश राजवाडे, तलवापारा के सचिव बृजेश साहू, भण्डारपारा के सचिव राम भजन तिग्गा और ओडगी के सचिव मनोज साहू द्वारा वित्तीय नियमों को ताक पर रखकर भारी भ्रष्टाचार किया गया है। कटकोना ग्राम पंचायत में एक ही कार्य के लिए दो अलग-अलग लोगों को लाखों रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन इस गंभीर अनियमितता की आज तक कोई जांच जनपद अधिकारी द्वारा नहीं कराई गई। सूत्रों की मानें तो ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर आई राशि का खुलेआम बंदरबांट हो रहा है। बिना जीएसटी के बिलों पर भुगतान, बाजार मूल्य से दोगुनी दर पर सामग्री खरीदी और ऐसी दुकानों के बिल लगाए गए हैं, जहां वह सामग्री मिलती ही नहीं। ओडगी ग्राम पंचायत में 1.5 एचपी का समर्सिबल पंप, जिसकी बाजार कीमत 19,500 से 21,500 रुपये है, उसे 39,900 रुपये में खरीदा गया। स्थानीय लोगों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या यह पंप विदेश से मंगाया गया था, जो इतनी महंगी कीमत चुकाई गई।
तलवापारा ग्राम पंचायत में तत्कालीन ग्राम सचिव बृजेश साहू द्वारा अपनी ही दुकान के बिलों पर तो जीएसटी लगाया गया, लेकिन अन्य भुगतान में जीएसटी बिल तक संलग्न नहीं किए गए। सफाई के नाम पर भी लाखों रुपये का कथित रूप से गबन किया गया है। वहीं ओडगी पंचायत में तीन माह से अधिक समय पहले स्थानांतरित ग्राम सचिव मनोज साहू आज तक पदभार नहीं सौंपे गए, फिर भी राशि का आहरण किया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से नियम विरुद्ध है। पूर्व उप सरपंच सागरपुर ने इस पर जांच और कार्रवाई की मांग की है। ग्राम पंचायत कटकोना में एक शिक्षक पर भी आरोप है कि वे बच्चों को पढ़ाने के बजाय ग्राम सचिव के साथ मिलकर अपने निजी विकास में लगे हैं। नीरज कुमार तिवारी और मुकेश गुप्ता ट्रेडर्स को दो-दो बार भुगतान किए जाने का मामला भी सामने आया है, जिसकी निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है।
नियम और धाराएं:
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 69 एवं 92 के तहत पंचायत निधि के दुरुपयोग पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। वहीं छत्तीसगढ़ वित्तीय नियम तथा सामान्य वित्तीय नियम (GFR) के अनुसार बिना वैध बिल, जीएसटी और बाजार दर सत्यापन के भुगतान गंभीर वित्तीय अपराध की श्रेणी में आता है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 के अंतर्गत भी यह कृत्य दंडनीय है।
लगातार समाचारों के बावजूद जनपद अधिकारी की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। क्या यह “मलाई-मिठाई” का असर है या फिर भ्रष्टाचार पर जानबूझकर आंख मूंद ली गई है? अब देखना यह है कि जनदबाव और तथ्यों के सामने आने के बाद क्या जनपद अधिकारी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने को मजबूर होंगे या फिर अंधेर नगरी, चौपट राजा की कहावत यूं ही चरितार्थ होती रहेगी।
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