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शासकीय भूमि के अवैध हस्तांतरण और राजस्व विभाग की अनदेखी पर सवाल


कोरिया। जिले में शासकीय भूमि की रजिस्ट्री, नामांतरण और संलग्निकरण (अटैचमेंट) को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। बी-1 खसरा में दर्ज अहस्तांतरणीय शासकीय भूमि का न केवल विक्रय किया गया, बल्कि नियमों के विपरीत नामांतरण भी कर दिया गया। एक प्रकरण वर्तमान में जिला न्यायालय में विचाराधीन है, जिसमें शासकीय भूमि की बिक्री और नामांतरण किए जाने का आरोप है। मामला तूल पकड़ता देख संबंधित अधिकारी द्वारा नामांतरण निरस्त कर दिया गया, किंतु इससे पहले हुई अन्य शासकीय भूमि रजिस्ट्रीयों को लेकर भी शिकायतें लंबित हैं। कानूनी प्रावधानों की अनदेखी छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 165 के तहत शासकीय भूमि का हस्तांतरण प्रतिबंधित है। इसके अतिरिक्त धारा 170-ब और 257 के अंतर्गत अवैध कब्जा, विक्रय अथवा नामांतरण को शून्य (Void) माना जाता है। बी-1 खसरा में दर्ज अहस्तांतरणीय भूमि का विक्रय भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 तथा राज्य शासन के राजस्व नियमों का भी उल्लंघन है। इसके बावजूद रजिस्ट्री और नामांतरण की कार्यवाही होना विभागीय लापरवाही अथवा मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

नामांतरण, बटवारा और फौती में देरी

राजस्व विभाग की साप्ताहिक समय-सीमा बैठकों में नामांतरण, बटवारा और फौती जैसे मामलों का त्वरित निराकरण करने के निर्देश नियमित रूप से दिए जाते हैं, परंतु जमीनी स्तर पर ये निर्देश कागजों तक ही सीमित नजर आते हैं। आवेदकों को महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011 के तहत निर्धारित समय-सीमा का भी पालन नहीं हो रहा, जिससे आमजन को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

संलग्निकरण का ‘खेल’ जारी

29 अप्रैल 2025 को राजस्व विभाग में संलग्न कर्मचारियों को हटाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे, जिनका कुछ समय तक पालन भी हुआ। बाद में एसआईआर (Special Investigation/Inspection Report) का बहाना बनाकर उन्हीं कर्मचारियों को पुनः कार्यालय बुला लिया गया। जबकि शासन द्वारा 05 जून 2025 के बाद संलग्निकरण स्वतः समाप्त मानने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कोरिया जिले में संलग्निकरण का खेल थमता नजर नहीं आ रहा है, जो उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना है। जिम्मेदारी तय करने की मांग विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शासकीय भूमि के अवैध विक्रय और नामांतरण में संलिप्त अधिकारियों पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत कार्रवाई की जाए तो ऐसी घटनाओं पर रोक लग सकती है। साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467/468 (जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) के तहत भी प्रकरण बन सकता है। शासकीय भूमि की सुरक्षा, पारदर्शी नामांतरण प्रक्रिया और शासनादेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आम जनता का राजस्व व्यवस्था से विश्वास और कमजोर होगा। अब आवश्यकता है कि लंबित शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों व दलालों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि शासकीय भूमि का दुरुपयोग रोका जा सके।

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