बैकुंठपुर जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत खोड में समर्सिबल पंप खरीदी को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पंचायत स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोलकर रख दी है। आरोप है कि एक भाजपा नेता के द्वारा बाजार में 13,500 रुपये में मिलने वाले समर्सिबल पंप का मूल्य बढ़ाकर 25,500 रुपये दर्शाया गया, वह भी बिना किसी वैध जीएसटी बिल के। इस पूरे मामले में न सिर्फ सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप है, बल्कि जीएसटी चोरी जैसे गंभीर अपराध की आशंका भी जताई जा रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत खोड में कुल मिलाकर केवल दो नए समर्सिबल पंप ही लगाए गए हैं, जबकि एक पुराना पंप पहले से मौजूद है। जानकारी यह भी सामने आई है कि ये दोनों नए पंप सरपंच के द्वारा लगवाए गए हैं। इसके बावजूद पंचायत को लगभग 2 लाख 80 हजार रुपये का भारी-भरकम बिल थमा दिया गया। आरोप यह है कि उक्त भाजपा नेता ने पंचायत सचिव पर दबाव बनाकर जल्द से जल्द भुगतान करने को कहा, यह कहते हुए कि “वह भाजपा नेता है और सत्ता में उसकी पकड़ है।” सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि जब छत्तीसगढ़ प्रदेश में भाजपा की सरकार है, तो क्या भाजपा से जुड़े नेताओं को नियम-कानून तोड़ने की खुली छूट मिल गई है? बिना जीएसटी के बिल देना न केवल कर चोरी की श्रेणी में आता है, बल्कि यह सीधे-सीधे शासन को राजस्व हानि पहुंचाने का मामला भी है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या इस मामले में केवल ग्राम पंचायत सचिव को ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा, या फिर वास्तविक लाभ उठाने वाले प्रभावशाली नेता पर भी कार्रवाई होगी? ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि पंचायतों में इस तरह बाजार मूल्य से दोगुने दामों पर सामान थोपना अब आम बात होती जा रही है। सत्ता के संरक्षण में कुछ नेता पंचायतों को अपनी कमाई का जरिया बना रहे हैं। ग्राम पंचायत खोड का यह मामला इसका ताजा उदाहरण माना जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन और जिम्मेदार जांच एजेंसियां इस पूरे मामले में कितनी निष्पक्षता से जांच करती हैं। क्या जीएसटी चोरी, फर्जी बिल और दबाव की राजनीति पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी सत्ता के प्रभाव में दबा दिया जाएगा? फिलहाल यह प्रकरण पंचायत स्तर पर फैले भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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