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कुमेली–मानी के जंगलों में फिर धधक उठा “बावनपरियों” का खेल, हज से लौटे जनपद सदस्य पर अवैध जुए के फड़ संचालन के गंभीर आरोप


सुरजपुर। सुरजपुर  जिले के कुमेली और मानी के जंगलों में एक बार फिर अवैध जुए का खेल जोर-शोर से चलने की खबर सामने आई है। सूत्रों के अनुसार “बावनपरियों” के इस अवैध खेल का संचालन कथित तौर पर एक ऐसे जनपद सदस्य के संरक्षण में किया जा रहा है, जो हाल ही में हज यात्रा कर वापस लौटे हैं। आरोप है कि हज से लौटने के बाद उन्होंने फिर से पूरे दमखम के साथ अवैध जुआ संचालन शुरू कराने की “कसम” खा ली है। बताया जाता है कि कुछ दिन पहले कुमेली के जंगलों में यह जुए का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा था, लेकिन समाचार प्रकाशन के बाद पुलिस और जुआ संचालकों के बीच “सेटिंग” ध्वस्त हो गई थी। इसके बाद कुछ समय के लिए गतिविधियां थमी रहीं, लेकिन रविवार को मानी के जंगल में एक बार फिर अवैध जुए का फड़ सजने की सूचना है। इस बार जुए का संचालन शमसेर नामक व्यक्ति के द्वारा कराया गया, जो लंबे समय से इस अवैध धंधे में सक्रिय बताया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कुमेली और मानी दोनों जंगलों में यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से “सेटिंग” के तहत चल रहा है। आरोप यह भी है कि जुआ न पकड़े जाने के एवज में प्रतिदिन 30 से 40 हजार रुपये तक की रकम दी जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर शमसेर का संरक्षक कौन है, जो उसे पुलिस और प्रशासन से बेखौफ होकर अवैध जुआ संचालन की खुली छूट दे रहा है। यह पूरा मामला अब सुरजपुर पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। लोगों में चर्चा है कि आखिर पुलिस क्यों कार्रवाई नहीं कर रही है। क्या किसी बड़े प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने के लिए आंखें मूंदी जा रही हैं, या फिर अवैध जुए से होने वाली मोटी कमाई का हिस्सा ऊपर तक पहुंच रहा है? क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि जुए के इस खेल से हजारों नहीं, बल्कि लाखों रुपये का लेन-देन हो रहा है। जानकारी के अनुसार, इस अवैध जुए में केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि बैकुण्ठपुर के कुछ चुनिंदा सूदखोर और खिलाड़ी भी पहुंचते हैं। इसके अलावा चरचा, सुरजपुर, अंबिकापुर के साथ-साथ मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से भी नामी जुआरी यहां आकर खेलते हैं। कई लोग इस खेल में अपनी गाढ़ी कमाई गंवा चुके हैं, जिससे उनके परिवार आर्थिक और सामाजिक संकट से जूझ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सुरजपुर पुलिस इस मामले में कब और कैसी ठोस कार्रवाई करती है। क्या शमसेर और उसके कथित संरक्षकों पर शिकंजा कसा जाएगा, या फिर कुमेली और मानी के जंगलों में अवैध जुए का यह खेल यूं ही बेखौफ चलता रहेगा।

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