बैकुण्ठपुर। एक ओर जिले में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय से लगे बड़गांव ग्राम पंचायत में दर्दनाक सड़क हादसा प्रशासनिक दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। इस हादसे में मोटरसाइकिल सवार दो नाबालिगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसका जिला चिकित्सालय में उपचार जारी है। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बड़गांव ग्राम पंचायत क्षेत्र में एक मोटरसाइकिल पर तीन लोग सवार होकर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि तीनों में से दो नाबालिग थे। तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण बाइक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दो नाबालिगों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। इस हादसे ने एक बार फिर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने और यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाए जाने के गंभीर मुद्दे को सामने ला दिया है। लगातार देखा जा रहा है कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में नाबालिग बेखौफ होकर दोपहिया वाहन चला रहे हैं। इतना ही नहीं, स्टंटबाजों का आतंक भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्य सड़कों पर बाइक से खतरनाक करतब करना और चारपहिया वाहनों की सनरूफ से बच्चों को बाहर निकालकर चलना आम दृश्य बनता जा रहा है, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।
यातायात विभाग द्वारा दावा किया जा रहा है कि सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत लोगों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने और नियमों का पालन करने के लिए जागरूक किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाएं इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। न तो नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर प्रभावी रोक लग पा रही है और न ही नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होती दिख रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन द्वारा सख्त कदम उठाए गए होते, तो शायद दो मासूम जानें नहीं जातीं। इस घटना के बाद आमजन ने यातायात नियमों के कड़ाई से पालन और नाबालिगों को वाहन देने वाले अभिभावकों पर भी कार्रवाई की मांग की है। बड़ागांव हादसा न सिर्फ एक दुर्घटना है, बल्कि यह व्यवस्था की बड़ी चूक का आईना भी है, जिस पर गंभीर मंथन और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता।


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