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न्यायाधीश शैलेश कुमार तिवारी का बड़ा फैसला: 70 किलो गांजा तस्करी मामले में तीन दोषियों को 15–15 साल की सजा, 2-2 लाख का अर्थदंड



बैकुंठपुर। विशेष न्यायाधीश (एन.डी.पी.एस. एक्ट) शैलेश कुमार तिवारी ने मादक पदार्थों की तस्करी के एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपियों को 15-15 वर्ष के कठोर कारावास तथा प्रत्येक पर 2-2 लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया है। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।


यह प्रकरण विशेष आपराधिक प्रकरण क्रमांक 23/2021, अपराध क्रमांक 202/2021 से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार 1 जुलाई 2021 को थाना खड़गवां क्षेत्र अंतर्गत पीओडीहिड चौक पर पुलिस को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि एक बोलेरो वाहन में बड़ी मात्रा में गांजा परिवहन किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर बोलेरो वाहन क्रमांक CG 10 N 7651 को रोका। तलाशी के दौरान वाहन की सीट के नीचे प्लास्टिक टेप से लिपटे 14 पैकेटों में कुल 70 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया, जो वाणिज्यिक मात्रा की श्रेणी में आता है। पुलिस द्वारा मौके पर ही विधिवत पंचनामा तैयार कर मादक पदार्थ को जब्त किया गया। प्रत्येक पैकेट का वजन लगभग 5 किलोग्राम पाया गया। नियमानुसार नमूने लेकर सील किए गए और शेष गांजा मालखाने में सुरक्षित रखा गया। इस दौरान एन.डी.पी.एस. एक्ट की धारा 42, 50, 55, 57 सहित सभी वैधानिक प्रावधानों का पालन किया गया। बाद में जब्त सामग्री को परीक्षण हेतु प्रयोगशाला भेजा गया, जहां से रिपोर्ट में पदार्थ गांजा होना प्रमाणित हुआ। प्रकरण में अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान, जब्ती पंचनामा, एफएसएल रिपोर्ट और विवेचना के आधार पर न्यायालय ने यह माना कि आरोपीगण राजेन्द्र सिंह, राजकुमार देवांगन एवं गुलशन साहू ने संयुक्त रूप से गांजा का अवैध परिवहन किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बरामद गांजा वाणिज्यिक मात्रा में होने के कारण अपराध की गंभीरता अत्यधिक है और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है ताकि समाज में नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जा सके।


न्यायाधीश शैलेश कुमार तिवारी ने अपने निर्णय में कहा कि एन.डी.पी.एस. अधिनियम के अंतर्गत अपराध केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक स्वास्थ्य और युवा पीढ़ी के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे अपराधों के प्रति किसी प्रकार की नरमी समाज के लिए घातक हो सकती है। इसलिए दोष सिद्ध होने पर कड़ा दंड दिया जाना न्यायोचित है। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि प्रकरण में जब्त गांजा अपील अवधि समाप्त होने के पश्चात अंतिम नष्टीकरण हेतु सक्षम समिति को सुपुर्द किया जाए। वहीं, प्रकरण में प्रयुक्त बोलेरो वाहन को भी विधि अनुसार जब्ती की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आरोपियों को सजा भुगतने हेतु जिला जेल बैकुंठपुर भेजा गया है। फैसले के दौरान बचाव पक्ष द्वारा आरोपियों की कम उम्र और प्रथम अपराध का हवाला देते हुए न्यूनतम सजा की मांग की गई थी, किंतु अभियोजन द्वारा यह तर्क रखा गया कि वाणिज्यिक मात्रा में मादक पदार्थ की तस्करी किसी भी स्थिति में गंभीर अपराध है। न्यायालय ने अभियोजन के तर्कों से सहमति जताते हुए न्यूनतम से अधिक कठोर सजा सुनाई। इस फैसले को जिले में मादक पदार्थों के विरुद्ध चल रही कार्रवाई के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। न्यायिक हलकों में भी इस निर्णय की सराहना हो रही है, क्योंकि इससे नशे के कारोबार में लिप्त लोगों को कड़ा संदेश गया है कि कानून से बच पाना संभव नहीं है।

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