बैकुण्ठपुर। ग्राम पंचायत खांडा क्षेत्र में कई ईंट भट्ठे बिना आवश्यक अनुमति और नियमों के संचालित किए जा रहे हैं। यह ईंट भट्ठे न केवल ग्राम पंचायत की पूर्व स्वीकृति (एनओसी) के बिना चल रहे हैं, बल्कि अब तक पंचायत को देय रॉयल्टी का भुगतान भी नहीं किया गया है। इस गंभीर लापरवाही को लेकर ग्राम पंचायत द्वारा संबंधित ईंट भट्ठा संचालकों को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन सूत्रों के अनुसार नोटिस जारी हुए लगभग तीन माह बीत जाने के बावजूद अब तक किसी भी संचालक ने जवाब देना उचित नहीं समझा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ईंट भट्ठों के आसपास पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले अनिवार्य पौधारोपण का भी पूरी तरह से पालन नहीं किया जा रहा है। नियमों के अनुसार प्रत्येक ईंट भट्ठा संचालक को प्रतिवर्ष अपने भट्ठे के चारों ओर पौधारोपण करना आवश्यक है, ताकि वायु प्रदूषण, मिट्टी क्षरण और पर्यावरणीय असंतुलन को रोका जा सके। लेकिन खांडा ग्राम पंचायत क्षेत्र में संचालित अधिकांश ईंट भट्ठों के आसपास एक भी पौधा नहीं लगाया गया है।
ईंट भट्ठा संचालन से जुड़े प्रमुख नियम इस प्रकार हैं—
ईंट भट्ठा संचालन से पूर्व ग्राम पंचायत, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं संबंधित विभाग से अनुमति (एनओसी) लेना अनिवार्य है।
ईंट भट्ठा संचालक को निर्धारित रॉयल्टी ग्राम पंचायत में समय पर जमा करनी होती है।
भट्ठे के चारों ओर प्रति वर्ष पौधारोपण करना अनिवार्य है, जिससे पर्यावरणीय क्षति को कम किया जा सके।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए धुआं नियंत्रण, राख प्रबंधन और श्रमिकों की सुरक्षा के उपाय करना आवश्यक है।
नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर भट्ठा सील करने एवं दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ईंट भट्ठों से निकलने वाले धुएं और राख के कारण स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, वहीं खेती योग्य भूमि की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ग्राम पंचायत स्तर पर नोटिस जारी किए जाने के बाद भी कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक नियमों की अनदेखी कर रहे ईंट भट्ठा संचालकों पर सख्त कदम उठाता है और पंचायत व पर्यावरण के हित में ठोस कार्रवाई करता है।

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