गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में इन दिनों '52 पत्ती' का जुआ एक बार फिर जोरों पर है। मरवाही क्षेत्र के शिवनी-धनपुर से सटे सीमावर्ती जंगलों में जुआरियों का मेला सजा है, तो पेंड्रा के ग्राम कुदरी, सेवरा, माझगवा और पेंड्रा लोकल इलाकों में भी यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। स्थानीय थानों और साइबर सेल की निष्क्रियता पर अब सवाल उठने लगे हैं।
जिले के इन संवेदनशील इलाकों में जुआ का खेल दिन-दहाड़े फल रहा है। शिवनी-धनपुर के जंगलों में रात के अंधेरे में सैकड़ों लोग जुटते हैं, जहां लाखों रुपये का दांव लगता है।
पेंड्रा के कुदरी और सेवरा गांवों में घरों के अंदर ही '52 परी का अड्डा' लग रहा हैं, जबकि माझगवा में खेतों के किनारे यह कारोबार पनप रहा है। इन इलाकों में युवा वर्ग भी इसमें लिप्त हो रहा है, जो सामाजिक बुराई को बढ़ावा दे रहा है।स्थानीय निवासियों का कहना है कि जुआ से नशाखोरी, पारिवारिक कलह और अपराध बढ़ रहे हैं। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "पेंड्रा थाने से लगभग कुछ ही किलोमीटर की दूरी में ही जुआ चलता है, लेकिन पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं करती? साइबर सेल ऑनलाइन जुआ रोकने का दावा करता है, लेकिन लोकल स्तर पर कुछ नहीं हो रहा।" जिले में पिछले छह माह में जुए के केवल दो-चार मामलों में कार्रवाई हुई है, जबकि शिकायतें दर्जनों हैं। दिन ब दिन जुआ को संचालित करने वाले अब युवा वर्ग के नए युवक अब इसमें अपना सुध ले रहे है| सूत्रों के अनुसार यह भी बताया जाता है कि बिना छोटे प्रशासनिक अधिकारी के मिलीभगत के बिना इस अवैध कार्य को संचालित नहीं किया जा सकता। जंआ एक्ट 1867 के तहत सख्त सजा का प्रावधान है, फिर भी पुलिस की लापरवाही से जुआरियों का हौसला बुलंद है। विशेषज्ञों का मानना है कि थानों में विशेष निगरानी दलों का गठन और साइबर सेल की सक्रियता जरूरी है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और एसपी से तत्काल छापेमारी की मांग की है।क्या जिला प्रशासन इस जुआ के जाल को तोड़ पाएगा? स्थानीय थानों की भूमिका पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जागरूक नागरिकों को चाहिए कि वे गुमनाम शिकायत दर्ज कराएं, ताकि यह बुराई जड़ से उखड़ सके।

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