कोरिया। ग्राम पंचायत कटकोना में विकास कार्यों के नाम पर 15वें वित्त आयोग की राशि के खुलेआम दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत में एक शिक्षक द्वारा फर्जी जीएसटी बिल लगाकर विकास राशि की वसूली की जा रही है, जबकि पंचायत सचिव गणेश रजवाड़ी की मिलीभगत से करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये का बंदरबांट किया गया है। ग्रामीणों और दस्तावेजों से मिली जानकारी के अनुसार, बिलों में जीएसटी नंबर तो दर्शाया गया है, लेकिन जांच में वह जीएसटी नंबर फेल अथवा अमान्य पाया गया है, इसके बावजूद भुगतान लगातार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बीते एक वर्ष में पंचायत में लगभग 23 लाख रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया है। इस दौरान करीब 50 हैंडपंप खुदवाने का रिकॉर्ड दिखाया गया, लेकिन कई स्थानों पर न तो कार्य की गुणवत्ता दिखाई देती है और न ही संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति ली गई है। आरोप यह भी है कि बिजली विभाग की अनुमति के बिना ही कार्य कराए गए, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। इतना ही नहीं, पंचायत के पुराने सामान को बिना किसी प्रशासनिक या उच्च अधिकारी की अनुमति के बेच दिया गया। यह कृत्य न केवल वित्तीय नियमों के खिलाफ है, बल्कि शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग की श्रेणी में भी आता है। उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत सचिव गणेश रजवाड़ी पर पूर्व में शासकीय दस्तावेजों में छेड़छाड़ के आरोप लग चुके हैं और शिक्षक से जुड़े एक मामले में जिला प्रशासन द्वारा उन्हें दोषी भी पाया गया था। इसके बावजूद वे आज भी कटकोना में ही पदस्थ हैं और स्थानांतरण आदेश के बाद भी नई जगह ज्वाइन नहीं किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि जनपद पंचायत के अधिकारियों का संरक्षण मिलने के कारण सचिव पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। चर्चा है कि अधिकारियों को सुविधाएं देने, स्कॉर्पियो वाहन व डीजल उपलब्ध कराने जैसे लाभ पहुंचाए जाते हैं, जिसके चलते जांच और कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाती है। यही कारण बताया जा रहा है कि लगातार शिकायतों और तथ्यों के बावजूद भ्रष्टाचार अधिकारियों को नजर नहीं आ रहा। कटकोना पंचायत का यह मामला 15वें वित्त की राशि के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण बनता जा रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य शासन से निष्पक्ष जांच, दोषियों के निलंबन तथा फर्जी बिलों से किए गए भुगतान की रिकवरी की मांग की है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला पूरे जनपद में विकास योजनाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है।

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