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प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा खेल! ग्राम पंचायत खोड में अपात्र को मिला आवास, जनपद प्रशासन की भूमिका संदिग्ध


कोरिया।  बैकुण्ठपुर जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत खोड में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर एक अजीबो-गरीब और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर केंद्र और राज्य सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से गरीब, बेघर और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत खोड में इस योजना की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत खोड की ग्राम सभा में जिस आवेदक को अपात्र घोषित किया गया था, उसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दे दिया गया। हैरानी की बात यह है कि ग्राम सभा के निर्णय के बावजूद संबंधित व्यक्ति के पक्ष में जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर द्वारा पत्र जारी कर दिया गया और आवास की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई। यह पूरा मामला सामने आने के बाद भी जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त व्यक्ति पहले से पक्का मकान का मालिक है और उसके पास चार पहिया वाहन भी मौजूद है, इसके बावजूद उसे गरीबों के लिए बनी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया। वहीं वास्तविक गरीब, मजदूर और कच्चे मकानों में रहने वाले लोग आज भी आवास के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि योजना के लिए आवेदन करने के बाद उन्हें ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत कार्यालय तक बार-बार चक्कर लगाना पड़ता है, लेकिन उनकी फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। स्थानीय लोगों में यह चर्चा भी तेज है कि जिस व्यक्ति को आवास दिया गया है, वह भाजपा संगठन से जुड़ा हुआ है और जनपद सदस्य भी बताया जा रहा है। इसी कारण जनपद पंचायत स्तर पर उसके मामले में विशेष रुचि दिखाई गई और ग्राम सभा में अपात्र घोषित होने के बावजूद उसे लाभ दिला दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि वह व्यक्ति सत्ता से जुड़ा नहीं होता, तो शायद उसके आवेदन पर कभी विचार भी नहीं किया जाता। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या बैकुण्ठपुर जनपद पंचायत की भी इसमें मिलीभगत है? ग्रामीणों का साफ कहना है कि बिना अधिकारियों और कर्मचारियों की सांठ-गांठ के ऐसा संभव नहीं है। ग्राम सभा के निर्णय को दरकिनार करना और अपात्र व्यक्ति के पक्ष में पत्र जारी करना, प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है। ग्रामीणों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपेक्षा जताई है। यदि समय रहते इस प्रकरण पर कार्रवाई नहीं होती है, तो यह प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी जनकल्याणकारी योजना की साख पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर रह जाएगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी इस गंभीर मामले पर कब तक संज्ञान लेते हैं और गरीबों को उनका हक दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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