कोरिया। किसानों के हमाली भुगतान और सहकारी समितियों में आदिवासी अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर जिले में माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इन दोनों अहम मुद्दों को लेकर कोया पुनेम गोंडवाना महासभा, जिला कोरिया (छत्तीसगढ़) ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महासभा ने सहायक पंजीयक, सहकारी संस्थाएं बैकुंठपुर को ज्ञापन सौंपते हुए शासन-प्रशासन को पांच दिनों का स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है। महासभा के जिला अध्यक्ष रमेश सिंह टेकाम के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि शासन स्तर से कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। संगठन का आरोप है कि इससे किसानों और आदिवासी समाज में गहरा असंतोष व्याप्त है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि पूर्व में अपर कलेक्टर कोरिया और तहसीलदार बैकुंठपुर द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि किसानों को धान खरीदी से संबंधित हमाली का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए तथा सभी सहकारी समितियों में हमाली दर की सूची सार्वजनिक रूप से चस्पा की जाए। बावजूद इसके न तो समितियों में दर सूची लगाई गई और न ही अब तक किसानों को उनका बकाया भुगतान मिल पाया है। इस लापरवाही के चलते किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मामले का दूसरा और गंभीर पक्ष सहकारी समितियों में आदिवासी अध्यक्षों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। महासभा का कहना है कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों में आदिवासी वर्ग से अध्यक्ष नियुक्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद संबंधित विभाग द्वारा अब तक इन आदेशों का पालन नहीं किया गया है, जिसे न्यायालय की अवहेलना के रूप में देखा जा रहा है। महासभा ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि पांच दिनों के भीतर किसानों के हमाली भुगतान और सहकारी समितियों में आदिवासी अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर ठोस और लिखित कार्रवाई नहीं की गई, तो किसान एवं आदिवासी समाज उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। संगठन ने चक्का जाम आंदोलन की घोषणा करते हुए कहा है कि इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस चेतावनी के बाद जिले में प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब देखने वाली बात यह होगी कि तय समयसीमा के भीतर प्रशासन मांगों पर क्या कदम उठाता है या फिर जिले को आंदोलन का सामना करना पड़ेगा।

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