कोरिया। जिले के जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में उस समय हड़कंप मच गया, जब शहर के बीचोबीच बाई सागर पारा, तेरहपंथ के समीप बड़ी मात्रा में दवाइयां खुले में बिखरी हुई मिलीं। यह दृश्य न केवल चौंकाने वाला था, बल्कि बेहद चिंताजनक भी, क्योंकि इन दवाओं के बीच छोटे-छोटे नाबालिग बच्चे खेलते नजर आए और दवाइयों के कार्टून व डिब्बे उठाते दिखे। सबसे गंभीर बात यह रही कि कई दवाओं पर वर्ष 2027 तक की एक्सपायरी डेट दर्ज थी, जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। स्थानीय लोगों द्वारा इसकी सूचना स्वदेश न्यूज को दी गई, जिसके बाद स्वदेश न्यूज के माध्यम से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को मामले से अवगत कराया गया। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और मौके पर सहायक औषधि नियंत्रक जितेंद्र पाटीदार, ड्रग इंस्पेक्टर आलोक मिंज तथा ड्रग इंस्पेक्टर विकास लकड़ा पहुंचकर जांच में जुट गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मौके पर पाई गई दवाइयां पशु चिकित्सा विभाग से संबंधित हैं। इनमें कुछ दवाइयां ऐसी थीं जिनकी एक्सपायरी अवधि अभी काफी शेष है, जबकि कुछ दवाइयां पहले ही एक्सपायर हो चुकी थीं। खुले में इस तरह दवाइयों का फेंका जाना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे आमजन और खासकर बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। जांच के बाद मामले की जानकारी पशु विभाग के अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद पशु विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने बताया कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि ये दवाइयां ट्रांसपोर्ट के दौरान थीं और किसी कारणवश यहां पहुंच गईं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ट्रांसपोर्ट के दौरान इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयां कैसे और किन परिस्थितियों में खुले स्थान पर पहुंचीं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया है कि आखिर जिम्मेदार कौन है और इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन दवाइयों को हटाया नहीं जाता, तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब कमेटी बनाकर विस्तृत जांच की मांग उठ रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।

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