कोरिया। जिले के नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत बैकुंठपुर शहर में लंबे समय से अटकी दो महत्वपूर्ण भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर आखिरकार नगर पालिका परिषद में सहमति बन गई है। मानस भवन के समीप तथा भट्टीपारा में स्कूल के सामने स्थित इन दोनों भूखंडों को नगर पालिका के अधिपत्य में लेने के लिए लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की राशि जमा किए जाने का निर्णय लिया गया है। उल्लेखनीय है कि यह राशि पिछले करीब डेढ़ वर्ष से लंबित बनी हुई थी, जिसके चलते अधिग्रहण की प्रक्रिया ठप पड़ी थी।
इस विषय पर 12 दिसंबर 2025 को आयोजित नगर पालिका परिषद की बैठक में विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में गैस पाइप लाइन से प्राप्त राशि के माध्यम से नगर पालिका की विभिन्न लंबित देनदारियों के भुगतान को लेकर विचार-विमर्श हुआ। परिषद का उद्देश्य वर्षों से पेंडिंग पड़े भुगतानों का निपटारा करना था, लेकिन इस प्रस्ताव पर सभी सदस्यों के बीच सर्वसम्मति नहीं बन सकी। इसके बावजूद परिषद में यह स्पष्ट सहमति बनी कि मानस भवन के बगल तथा भट्टीपारा स्थित स्कूल के सामने की भूमि के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की राशि अनिवार्य रूप से जमा की जाएगी।
नगर पालिका उपाध्यक्ष आशीष यादव ने इस मुद्दे को शहर के समग्र विकास से जोड़ते हुए मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि शहर के मध्य स्थित इन दोनों भूमि का अधिग्रहण भविष्य की विकास योजनाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है। उपाध्यक्ष ने भुगतान के लिए एक माह की समय-सीमा तय करने पर जोर देते हुए चेतावनी दी कि यदि निर्धारित अवधि में अधिपत्य की राशि जमा नहीं की जाती, तो आगामी परिषद बैठक में सीएमओ एवं राजस्व अधिकारी के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा। गौरतलब है कि इन दोनों भूमि पर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। यदि यह परियोजना साकार होती है तो इससे नगर पालिका की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है, साथ ही शहर के व्यावसायिक, सामाजिक और संरचनात्मक विकास को भी नई दिशा मिलेगी। परिषद सूत्रों के अनुसार गैस पाइप लाइन से प्राप्त राशि का बड़ा हिस्सा पहले ही विभिन्न मदों में खर्च किया जा चुका है, जबकि शेष राशि को भी अन्य लंबित भुगतानों में उपयोग करने की तैयारी थी। ऐसे में इन दोनों भूमि के अधिग्रहण के लिए राशि किस स्रोत से और कब उपलब्ध कराई जाएगी, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। फिलहाल शहरवासियों और जनप्रतिनिधियों की नजरें आगामी परिषद बैठक पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि प्रशासन तय समय-सीमा में निर्णय को अमल में लाता है या यह महत्वपूर्ण मामला एक बार फिर लंबित रह जाता है।


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