कोरिया। विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) शैलेश कुमार तिवारी की अदालत ने 6 किलो 160 ग्राम अवैध गांजा रखने के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी रविदास वैष्णव को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपी को स्वापक औषधि तथा मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 की धारा 20(b)(ii)(B) के तहत 05 वर्ष का कठोर कारावास तथा 50,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में 03 माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। मामला 03 जुलाई 2020 का है, जब फुलपुर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि एक युवक काले रंग के बैग में गांजा रखकर बेचने के लिए ग्राहक तलाश कर रहा है। सूचना पर उप निरीक्षक एवं टीम मौके पर पहुँची, जहां संदिग्ध रविदास वैष्णव को रोककर पूछताछ की गई। तलाशी लेने पर उसके बैग से 06 पैकेट में पैक किया हुआ गांजा मिला, जिसका कुल वजन 6 किलो 260 ग्राम पाया गया। हालांकि शुद्ध गांजे का वजन 6 किलो 160 ग्राम निकला। पुलिस ने मौके पर ही विधिवत् पंचनामा कार्रवाई करते हुए गांजे का सैंपल तैयार किया एवं आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। जांच एवं परीक्षण के बाद यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी के पास पाया गया मादक पदार्थ व्यावसायिक मात्रा का है, जो NDPS एक्ट के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। काफी समय तक चले न्यायिक विचारण के बाद विशेष न्यायाधीश शैलेश तिवारी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत निर्णय सुरक्षित किया और 01 दिसंबर 2025 को फैसला सुनाया। न्यायालय ने कहा कि आरोपी द्वारा मादक पदार्थ रखने का अपराध संदेह से परे सिद्ध होता है, अतः उसे कठोर कारावास और अर्थदंड दिया जाता है। फैसला सुनाए जाने के समय आरोपी जमानत पर था, जिसे अदालत ने तत्काल तत्काल निरस्त करते हुए न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया। साथ ही सजा वारंट तैयार कर आरोपी को जिला जेल बैकुंठपुर भेजने का निर्देश दिया गया। न्यायालय ने इस प्रकरण में जब्त 6 किलो 160 ग्राम गांजे को विधि अनुसार नष्ट करने हेतु औषधि निपटान समिति को सुपुर्द करने का आदेश भी जारी किया। विशेष न्यायाधीश शैलेश तिवारी द्वारा दिया गया यह निर्णय मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध सख्त संदेश माना जा रहा है।

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