कोरिया। तहसील कार्यालय बैकुण्ठपुर से अस्थायी जाति प्रमाण पत्र की नकल जारी न होने के बावजूद विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से एक शासकीय सेवक की सेवा पुस्तिका से जुड़े गोपनीय दस्तावेज बाहर आ जाना गंभीर प्रशासनिक उल्लंघन माना जा रहा है। अस्थायी जाति प्रमाणपत्र का संलग्निकरण केवल तहसील कार्यालय द्वारा प्रमाणित प्रति के माध्यम से ही वैध होता है, किंतु इस मामले में दस्तावेज सीधे शिक्षा विभाग के कार्यालय से बाहर आए, जो नियमों तथा प्रक्रिया—दोनों का खुला उल्लंघन है। सूत्रों के अनुसार, यह प्रकरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965, धारा 3(1) का सीधा उल्लंघन है, जिसमें सरकारी सेवक को कर्तव्यनिष्ठ, जवाबदेह और गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रावधान है। सेवा पुस्तिका जैसे संवेदनशील दस्तावेज़ का बिना अनुमति कार्यालय से बाहर भेजना इस धारा के विपरीत गंभीर कदाचार माना गया है। मामले में संलग्निकरण पर कार्यरत कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जा रही है। यह वही कर्मचारी हैं जिनके बारे में पहले यह शिकायतें थीं कि वे बिना कार्य किए वेतन ले रहे थे, और अब जब उन्हें काम सौंपा गया है, तो उनके द्वारा गोपनीय दस्तावेज़ बाहर भेजे जाने की बात सामने आ रही है। सूत्रों का कहना है कि ऐसे कर्मचारियों पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा त्वरित कार्रवाई आवश्यक है, ताकि प्रशासनिक अनुशासन पुनः स्थापित हो सके। इसी बीच, जिले में यह सवाल भी जोर पकड़ रहा है कि क्या कलेक्टर कोरिया इस मामले में संज्ञान लेंगी, या फिर यह मामला भी सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग के लिपिक दयाशंकर साहू के खिलाफ हुई शिकायत की तरह दबा दिया जाएगा, जिसकी जांच वर्षों से लंबित है। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि यदि इस बार भी कार्रवाई नहीं होती, तो विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह और गहरा जाएगा। अब पूरा मामला जांच के इंतजार में है, और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोषी कर्मचारी के खिलाफ वास्तविक व त्वरित कार्रवाई होती है या यह भी किसी फाइल में धूल खाता रह जाएगा।

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