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बिना आदेश विदेश गए लेखापाल दयाशंकर पर कार्रवाई ठप, संरक्षण का उठ रहा सवाल - 12 हजार रिश्वत लेकर क्या दी गई मातृत्व अवकाश की छुट्टी

 


कोरिया। सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग में वर्ष 2014 से लेखापाल के रूप में कार्यरत दयाशंकर साहू का बिना किसी प्रशासकीय आदेश के वर्ष 2017 में विदेश जाना अब भी जांच की प्रतीक्षा में है। इस मामले में लगातार समाचार प्रकाशित होने के बाद भी कार्रवाई का ठंडे बस्ते में चले जाना प्रशासनिक गंभीरता पर सवाल खड़े कर रहा है। दिसंबर 2024 में पहली बार मामले का खुलासा होने पर तत्कालीन कलेक्टर द्वारा जिला पंचायत अधिकारी को जांच के मौखिक निर्देश दिए गए थे, लेकिन जांच शुरू ही नहीं हो सकी। इसके बाद अक्टूबर 2025 में पुनः समाचार प्रकाशित हुआ, तब अपर कलेक्टर कोरिया को जांच का जिम्मा सौंपा गया, किंतु आज तक जांच आगे नहीं बढ़ पाई है। नियमानुसार, कोई भी शासकीय कर्मचारी बिना विभागीय अनुमति के विदेश यात्रा करता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। अनधिकृत अनुपस्थिति और सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन पर वेतन रोकना, निलंबन, कारण बताओ नोटिस से लेकर विभागीय जांच और बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव होती है। मगर दयाशंकर साहू के मामले में दो-दो बार जांच के निर्देश जारी होने के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम न उठाया जाना इस बात की ओर संकेत करता है कि कहीं न कहीं उन्हें किसी प्रभावशाली अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है।

सूत्रों का दावा—12 हजार रुपये लेकर छुट्टी मंजूर करने का आरोप

इस पूरे विवाद के बीच नए आरोप भी सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, एक महिला अधीक्षक जब मातृत्व अवकाश लेने विभाग पहुंचीं, तब विवादित लिपिक द्वारा छुट्टी स्वीकृत करने के एवज में उनसे कथित रूप से 12 हजार रुपये की मांग की गई और राशि लेने के बाद ही छुट्टी प्रदान की गई। इस गंभीर आरोप ने विभागीय कार्यप्रणाली और भी संदिग्ध बना दी है। यदि किसी सामान्य कर्मचारी पर ऐसे आरोप लगते, तो कार्रवाई तत्काल शुरू हो जाती, लेकिन इस मामले में जांच लगातार टलने से प्रशासन की निष्क्रियता और जवाबदेही दोनों पर सवाल उठ रहे हैं। जिले में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता अब और अधिक महसूस की जाने लगी है।

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