कोरिया। राजस्व व्यवस्था में लंबे समय से लंबित सुधारों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण पदस्थापना आदेश जारी किए हैं। मुकेश प्रताप सिंह को अब डायवर्सन मामलों सहित नजुल विभाग का भी प्रभार सौंपा गया है। इसका मतलब यह है कि अब एसडीएम कार्यालय में डायवर्सन से जुड़े फाइलों का निपटारा पिछला दरवाज़ा पकड़कर नहीं, बल्कि व्यवस्थित तरीके से किया जाएगा। यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वर्षों से चुनिंदा लोगों के लिए ही एसडीएम कार्यालय के दरवाजे खुले रहते थे, कई मामलों में रसीदें भी जमा नहीं पाई गई थीं। नजुल शाखा संभाल रहे छत्रसाय को सरडी क्षेत्र का आरआई बनाया गया है। इससे अब भू-माफिया सीधे आरआई से संपर्क कर काम नहीं करा सकेंगे, बल्कि किसी भी प्रकार की अनुमति के लिए उन्हें पहले तहसीलदार और एसडीएम से स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। पहले चेरवापारा राष्ट्रीय राजमार्ग में भू-माफियाओं द्वारा कई अनियमितताएं की गई थीं, जिन पर समाचार प्रकाशित होने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी बनी हुई थी, लेकिन वर्तमान एसडीएम उन चुनिंदा अधिकारियों में से एक हैं जिन्होंने मीडिया की खबरों को गंभीरता से लेते हुए यह आवश्यक कार्रवाई की है। अजय शर्मा को बड़गांव के साथ-साथ मनसुख का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जबकि कलेक्टर कार्यालय के भू-अर्जन शाखा में पहले से ही कई आरआई पदस्थ हैं, जो प्रतिदिन कार्यालय में मौजूद तक नहीं रहते। भू-अर्जन शाखा में कुर्सियां खाली रहना आम बात हो गई है, जबकि निजी कामों में व्यस्त रहने वाले आरआई को अतिरिक्त हल्का सौंपना कई सवाल खड़ा करता है। इधर पुनमरानी देवदास को भू-अर्जन शाखा का प्रभार दिया गया है, जिसे लेकर भी अंदरूनी ‘मांडवाली’ की चर्चा तेज है। पहले भी पटवारियों की तबादला सूची में कई चौंकाने वाले नाम सामने आए थे, जिससे अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, एसडीएम द्वारा की गई इस कार्रवाई को व्यवस्था सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन कुछ नियुक्तियों को लेकर उठ रहे सवाल बताते हैं कि राजस्व विभाग में पारदर्शिता की राह अभी भी लंबी है।

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