कसरा ग्राम पंचायत में चल रही अनियमितताओं को लेकर लगातार समाचार माध्यमों के जरिए आम जनता को अवगत कराया जा रहा था। पंचायत में कई कार्य लंबे समय से अधूरे पड़े थे, जिनके लिए राशि तो जारी कर दी गई थी, लेकिन जमीन पर कोई प्रगति नजर नहीं आ रही थी। टीहाईपारा में होने वाले निर्माण कार्य को लेकर भी लगभग 40% राशि छह माह पहले ही निकाल ली गई थी, जबकि स्थल पर कोई काम शुरू नहीं हुआ था। लगातार समाचार प्रकाशन और जनदबाव के बाद अंततः सरपंच और सचिव हरकत में आए तथा अब उक्त निर्माण कार्य को शुरू करवा दिया गया है। हालांकि, इसी बीच जनपद पंचायत अधिकारी की लापरवाही और संदिग्ध भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अधिकारी कभी फील्ड निरीक्षण के लिए नहीं जाते, न ही निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग करते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जनपद अधिकारी की रुचि केवल ‘दो प्रतिशत कमीशन’ लेने तक ही सीमित है, जबकि वास्तविक विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा से उनका कोई लेना-देना नहीं दिखाई देता। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को बचाने में जनपद अधिकारी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनके द्वारा जांच को टालना, फाइलों को दबाकर रखना और दोषियों पर कार्रवाई न करना आम बात हो गई है। इसी कारण पंचायतों में अनियमितताओं का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है और ग्रामीण विकास प्रभावित हो रहा है।कसरा ग्राम पंचायत के मामले ने एक बार फिर दिखा दिया है कि प्रशासनिक ढिलाई और संरक्षण के कारण भ्रष्टाचार पनप रहा है। समाचार प्रकाशन के बाद जहां पंचायत स्तर के जिम्मेदार जागे, वहीं जनपद पंचायत अधिकारी की चुप्पी और निष्क्रियता जनहित के खिलाफ गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि उच्च अधिकारियों को मामले में हस्तक्षेप कर जांच करानी चाहिए, ताकि विकास योजनाओं की राशि का समुचित उपयोग सुनिश्चित हो सके।

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