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अडानी भूमि आवंटन से लेकर चुनाव बहिष्कार और नक्सलवाद पर बोले अमित जोगी, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

 


कोरिया। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में शासन-प्रशासन की पारदर्शिता लगातार खत्म होती जा रही है और जनहित से जुड़े निर्णय रात के अंधेरे में लिए जा रहे हैं। अमित जोगी ने सबसे पहले अडानी समूह को भूमि आवंटन के मामले पर सरकार को घेरते हुए कहा कि 25 नवंबर को छुट्टी के दिन प्रदेश सरकार ने नियमों की अनदेखी करते हुए जमीन का आवंटन कर दिया। उन्होंने दावा किया कि यह वही जमीन है जिसे वर्ष 2002 में एलिफेंट रिज़र्व के लिए सुरक्षित किया गया था। जोगी ने इसे सरकार की विवशता नहीं बल्कि "मिलीभगत और पक्षपात" का उदाहरण बताया। उनका कहना है कि इस तरह की गोपनीय कार्रवाई सरकार की मंशा को संदिग्ध बनाती है और वन एवं पर्यावरण सुरक्षा को खतरे में डालती है। चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी जोगी का रुख बेहद सख्त रहा। उन्होंने साफ कहा कि वर्तमान व्यवस्था में उनकी पार्टी किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी और चुनाव बहिष्कार की नीति जारी रहेगी। उन्होंने राज्य व देश की सभी 42 मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों से अपील की कि जब तक चुनाव की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं होती, तब तक सभी दल चुनावी प्रक्रिया से दूरी बनाकर रखें। उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म करने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश की फिर से भूमिका तय करने की मांग रखी।नक्सलवाद पर बोलते हुए जोगी ने कहा कि संविधान और लोकतंत्र में विश्वास न रखने वाले तत्वों के प्रति सहानुभूति दिखाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने ज़ीरम, एर्राबोर, दरबेघाट और जिंका जैसी बड़ी नक्सली घटनाओं का उल्लेख करते हुए पूछा कि उन समयों में कोई सरेंडर की बात क्यों नहीं उठी। उनका कहना है कि ऐसे बयान सुरक्षा बलों का मनोबल कमजोर करते हैं। अब समय आ गया है कि इस लड़ाई को अंतिम मुकाम तक दृढ़ता से ले जाया जाए।
अमित जोगी के इन बयानों ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट पैदा कर दी है।

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