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धौराटिकरा सहकारी समिति में गंभीर आरोप: सेवा समाप्त कर्मचारी अजय साहू पर फर्जीवाड़ा, वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक मिलीभगत के सवाल


कोरिया। धौराटिकरा सहकारी समिति से सेवा समाप्त किए गए कर्मचारी अजय साहू को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं। मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत के बाद उनकी सेवाएं समाप्त की गई थीं, इसके बावजूद आरोप है कि अजय साहू ने फर्जी जानकारी देकर अपने जीजा–साले की जोड़ी के साथ मिलकर अधिकारियों को गुमराह किया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सेवा समाप्ति के बाद भी अजय साहू लगातार प्रशासन और अधिकारियों को भ्रमित कर रहे हैं और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं में लिप्त रहे हैं। मामले में यह भी आरोप है कि तत्कालीन सहायक नोडल अधिकारी से व्यक्तिगत संबंध बनाकर गलत कार्यों को अंजाम दिया गया। शिकायत में उल्लेख है कि 41 किलो 700 ग्राम धन (नकद/सामग्री) लिए जाने का मामला सामने आया, लेकिन इसके बावजूद न तो कर्मचारी पर और न ही संबंधित अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद प्रशासन मौन क्यों है?

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि लगभग 5.53 लाख रुपये की राशि को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच आपसी “बंधन” या सांठगांठ बनी हुई है, जिसके कारण कार्रवाई से बचा जा रहा है। इससे जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। इतना ही नहीं, सेवा समाप्त कर्मचारी के प्रतिवेदन के आधार पर मुख्यमंत्री के नाम की गई एक शिकायत को बंद कर दिया गया, जबकि शिकायत क्रमांक आज भी मुख्यमंत्री पोर्टल पर ऑनलाइन सक्रिय बताया जा रहा है।


धौराटिकरा सहकारी समिति से बर्खास्त अजय साहू पर लगातार वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि एक नाबालिग को भृत्य की नौकरी पर कार्यरत बताया गया, जो नियमों के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में आता है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायतों में अजय साहू की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आने के बाद भी जिला प्रशासन केवल “मुख्य दर्शक” बना हुआ है। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं की गई तो यह मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है। प्रशासन की चुप्पी कई संदेहों को जन्म दे रही है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इन आरोपों पर कब और क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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