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बायोमेट्रिक उपस्थिति को लेकर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने जताई आपत्ति, शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन


कोरिया। छत्तीसगढ़ में विद्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन से उपस्थिति दर्ज कराने को लेकर शिक्षक संगठनों में असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मोबाइल ऐप के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज कराने के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए इसे अव्यवहारिक और शिक्षकों की निजता व वित्तीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। इस संबंध में एसोसिएशन ने माननीय शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव तथा लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक को पत्र लिखकर अपनी बात रखी है। एसोसिएशन द्वारा दिनांक 09 जनवरी 2026 को जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति मोबाइल ऐप से दर्ज कराने का निर्णय लिया गया है, जो व्यवहारिक नहीं है। संगठन का कहना है कि शिक्षकों के निजी मोबाइल के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराना उनकी निजता पर सीधा हस्तक्षेप है, साथ ही यह साइबर सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि विभाग यदि बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करना चाहता है, तो प्रत्येक विद्यालय में बायोमेट्रिक (पंच) मशीन तथा स्थायी और सुरक्षित इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। बिना आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए शिक्षकों पर निजी मोबाइल के उपयोग का दबाव डालना अनुचित है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने पत्र में यह भी बताया है कि वर्तमान समय में कई शिक्षक साइबर ठगी के शिकार हो चुके हैं। फर्जी डीपीआई अधिकारी, पुलिस अधिकारी या बैंक अधिकारी बनकर शिक्षकों को कॉल करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि निजी मोबाइल पर शासकीय ऐप का दबाव डाला जाता है, तो इससे शिक्षकों पर मानसिक तनाव के साथ-साथ वित्तीय नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है। एसोसिएशन ने शासन से दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, प्रत्येक विद्यालय में बायोमेट्रिक (पंच) मशीन एवं इंटरनेट सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। दूसरी, शासकीय कार्यों के लिए प्रत्येक स्कूल को एक टैबलेट उपलब्ध कराया जाए, ताकि शिक्षकों को निजी मोबाइल के उपयोग के लिए बाध्य न होना पड़े। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक किसी भी सुधारात्मक व्यवस्था के विरोधी नहीं हैं, लेकिन बिना पर्याप्त सुरक्षा, संसाधन और विश्वास के थोपी गई व्यवस्था स्वीकार्य नहीं है। संगठन ने शासन से मांग की है कि शिक्षकों की सुरक्षा, निजता और सुविधा को ध्यान में रखते हुए ही कोई भी निर्णय लिया जाए।

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