कोरिया। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत NGO द्वारा संचालित बालगृह में कार्यरत कर्मचारियों ने बुधवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने प्रमुख रूप से अपनी सेवाएं यथावत रखे जाने की मांग करते हुए प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। ज्ञापन सौंपने पहुंचे कर्मचारियों ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से अनाथ, निराश्रित एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की सेवा पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करते आ रहे हैं। बालगृह में रह रहे बच्चों की सुरक्षा, पालन-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक विकास की जिम्मेदारी वे पूरी संवेदनशीलता के साथ निभा रहे हैं।
कर्मचारियों ने विशेष रूप से कोरोना महामारी काल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कठिन दौर में, जब पूरा देश भय और अनिश्चितता के माहौल से गुजर रहा था, तब भी उन्होंने अपने परिवारों से दूर रहकर बालगृह में ही निवास किया। कई महीनों तक वे परिसर से बाहर नहीं निकले और बच्चों की देखभाल में कोई कमी न आने दी। उन्होंने बताया कि उस समय बच्चों के भोजन, इलाज, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने अपनी जान की परवाह भी नहीं की।
कर्मचारियों ने आशंका जताई कि वर्तमान में उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं, जिससे उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। अधिकांश कर्मचारी सीमित आय पर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं और नौकरी समाप्त होने की स्थिति में उनके लिए जीवनयापन करना बेहद कठिन हो जाएगा। इसके साथ ही कर्मचारियों ने यह भी कहा कि यदि अनुभवी और प्रशिक्षित कर्मचारियों को हटाया गया, तो इसका सीधा असर बालगृह में रह रहे बच्चों की देखरेख और व्यवस्था पर पड़ेगा। वर्तमान कर्मचारी बच्चों की जरूरतों, व्यवहार और मानसिक स्थिति को भली-भांति समझते हैं, जिससे बच्चों को सुरक्षित और पारिवारिक माहौल मिल पाता है। ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने कलेक्टर से मांग की कि उनके अनुभव, सेवा और त्याग को ध्यान में रखते हुए NGO द्वारा संचालित बालगृह में कार्यरत सभी कर्मचारियों को यथावत सेवा में रखा जाए, ताकि बच्चों की देखभाल की व्यवस्था बाधित न हो। इस अवसर पर बड़ी संख्या में बालगृह कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से मानवीय और संवेदनशील निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि बच्चों और कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित रखना शासन-प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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