बैकुंठपुर। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गौ सेवक अनुराग दुबे ने मानवता और संवेदनशीलता की एक अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत की। बैकुंठपुर बाल मंदिर प्रांगण एवं अपने घर में रह रही बेसहारा गौवंशों के साथ उन्होंने पारंपरिक श्रद्धा एवं सेवा भाव के साथ मकर संक्रांति का पर्व मनाया। जिन गौवंशों का कोई सहारा नहीं होता, जिन्हें अक्सर सड़कों पर भटकते देखा जाता है, ऐसे निराश्रित गौवंशों को अनुराग दुबे अपने घर की गौशाला एवं बाल मंदिर प्रांगण में लाकर सुरक्षित आश्रय प्रदान करते हैं और नियमित रूप से उनकी देखभाल करते हैं। मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर अनुराग दुबे ने सर्वप्रथम बेसहारा गौवंशों की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात उन्होंने उन्हें तिल के लड्डू खिलाकर पर्व की खुशियां उनके साथ साझा कीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में गौ माता का विशेष स्थान है और गौ सेवा को सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। मकर संक्रांति जैसे पर्व पर गौ सेवा करना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। अनुराग दुबे ने आम नागरिकों से भी भावुक अपील की कि मकर संक्रांति के दिन जहां भी उन्हें कोई गौवंश दिखाई दे, वहां श्रद्धा के साथ तिल का लड्डू अथवा गौ आहार अवश्य खिलाएं। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों से भी गौवंशों के जीवन में सुख और सुरक्षा लाई जा सकती है। स्थानीय लोगों ने अनुराग दुबे के इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और दूसरों को भी सेवा के लिए प्रेरित करते हैं। मकर संक्रांति के इस अवसर पर गौ सेवा के माध्यम से अनुराग दुबे ने यह साबित कर दिया कि सच्चा पर्व वही है, जिसमें जरूरतमंदों और निराश्रितों के चेहरे पर मुस्कान लाई जाए।

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