बैकुंठपुर/सोनहत। सोनहत तहसील में ई-कोर्ट के नाम पर नामांतरण, फौती एवं बंटवारा जैसे राजस्व मामलों में आम लोगों को हो रही परेशानियों को लेकर प्रकाशित समाचार का असर अब स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है। खबर सामने आने के बाद तहसील प्रशासन हरकत में आया और महज दो से तीन दिनों के भीतर लगभग 30 लंबित प्रकरणों का त्वरित निपटारा कर दिया गया। पूर्व में ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि छोटे-छोटे राजस्व मामलों को भी ई-कोर्ट के नाम पर लंबी और जटिल प्रक्रिया में डाल दिया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को बार-बार तहसील और न्यायालय के चक्कर लगाने पड़ रहे थे। खासकर दूर-दराज और ग्रामीण अंचलों के लोगों को समय और आर्थिक नुकसान दोनों उठाना पड़ रहा था। कई मामलों में महीनों से फाइलें अटकी हुई थीं। मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद तहसील प्रशासन ने प्राथमिकता के आधार पर लंबित मामलों की समीक्षा शुरू की। सूत्रों के अनुसार तहसीलदार एवं राजस्व अमले ने उन प्रकरणों की सूची तैयार की, जिनका निराकरण तहसील स्तर पर ही संभव था। इसके बाद विशेष बैठकों और सुनवाई के माध्यम से नामांतरण, फौती एवं बंटवारे से जुड़े करीब 30 मामलों का समाधान किया गया। इससे न केवल आवेदकों को बड़ी राहत मिली, बल्कि तहसील कार्यालय में अनावश्यक भीड़ भी कम हुई। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय बाद प्रशासन की संवेदनशीलता देखने को मिली है। कई आवेदकों ने बताया कि वे महीनों से अपने मामलों को लेकर भटक रहे थे, लेकिन खबर प्रकाशित होने के बाद अचानक प्रक्रिया में तेजी आई और उन्हें राहत मिली। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इसे सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि यदि इसी तरह नियमित निगरानी और त्वरित कार्यवाही हो, तो आम जनता को बार-बार तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इधर, खबरों के अनुसार रामगढ़ क्षेत्रवासियों को भी जल्द राहत मिल सकती है। जानकारी मिल रही है कि रामगढ़ क्षेत्र में राजस्व विभाग द्वारा विशेष कैंप लगाए जाने की तैयारी की जा रही है, जिससे लोगों को सोनहत तहसील का बार-बार चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। हालांकि अब देखना यह होगा कि यह पहल केवल कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में रामगढ़ क्षेत्र के लोगों को इसका वास्तविक लाभ मिल पाता है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आगे भी ई-कोर्ट में भेजे जाने वाले मामलों की जांच की जाएगी और जो प्रकरण तहसील स्तर पर सुलझाए जा सकते हैं, उन्हें वहीं प्राथमिकता के साथ निपटाया जाएगा। यह पूरा मामला एक बार फिर साबित करता है कि जनसमस्याओं को उजागर करने वाली पत्रकारिता व्यवस्था को आईना दिखाने का काम करती है और समय पर उठाई गई आवाज से सुधार संभव है।

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