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15वें वित्त की राशि में बंदरबांट का आरोप: तलवापारा पंचायत में भ्रष्टाचार, स्थानांतरण आदेशों की अवहेलना और अवैध चेक भुगतान पर सवाल


कोरिया। जिले की ग्राम पंचायत तलवापारा में 15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पंचायत में “सट्टा गड्ढा” निर्माण के नाम पर लगातार राशि आहरित की गई, जबकि जमीनी स्तर पर ऐसा कोई कार्य मौजूद नहीं है। आरोप है कि कागजों में कार्य दर्शाकर पंचायत निधि का खुला बंदरबांट किया गया। इतना ही नहीं, एक ही फर्म के नाम पर बार-बार भुगतान दर्शाया गया और संबंधित कार्यों में जीएसटी बिल तक संलग्न नहीं किए गए, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका और गहरी हो गई है।


सूत्र बताते हैं कि यह पूरा मामला सरपंच और स्थानांतरण हो चुके सचिव की आपसी मिलीभगत से अंजाम दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि सचिव का विधिवत स्थानांतरण हो जाने के बावजूद वे आज भी पंचायत खाते से चेक काट रहे हैं, जो नियमों के सीधे उल्लंघन की श्रेणी में आता है। कई ग्राम पंचों का कहना है कि न तो उनसे किसी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए और न ही पंचायत की बैठकों में उन्हें बुलाया गया, इसके बावजूद विकास कार्यों के प्रस्ताव पारित दिखाकर राशि का आहरण कर लिया गया। शासन के सामान्य प्रशासन विभाग एवं पंचायत सेवा नियमों के अनुसार स्थानांतरण आदेश जारी होते ही संबंधित अधिकारी या कर्मचारी उस पद से कार्यमुक्त माना जाता है तथा सात दिवस के भीतर नवीन पदस्थापना स्थल पर पदभार ग्रहण करना अनिवार्य होता है। इस अवधि के बाद पूर्व पद पर किसी भी प्रकार का वित्तीय कार्य, विशेषकर चेक जारी करना, अवैध माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह कृत्य छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 69 (वित्तीय नियंत्रण) तथा धारा 92 (अनियमितता एवं दंड प्रावधान) का उल्लंघन है। साथ ही यह छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम के अंतर्गत गंभीर अनुशासनात्मक अपराध की श्रेणी में आता है।

गौरतलब है कि 03 नवम्बर 2025 को जिला पंचायत अधिकारी द्वारा ग्राम पंचायत सचिवों के स्थानांतरण आदेश जारी किए गए थे। कई सचिवों ने नियमानुसार नए स्थान पर पदभार ग्रहण कर लिया, लेकिन कुछ सचिव आज भी स्थानांतरण के बाद पुराने पंचायतों में “अंगद के पांव” की तरह जमे हुए हैं। सूत्रों का दावा है कि जनपद पंचायत अधिकारी चाहकर भी ऐसे सचिवों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। लगातार समाचार प्रकाशन के बावजूद जनपद पंचायत स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई न होना, और स्थानांतरण आदेशों की खुली अवहेलना, 15वें वित्त की राशि के दुरुपयोग में प्रशासनिक सहभागिता की ओर संकेत करता है। अब बड़ा सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी कागजों में ही दबकर रह जाएगा।

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