Ticker

6/recent/ticker-posts

बैकुण्ठपुर जनपद में स्थानांतरण आदेशों की अनदेखी, 15वें वित्त की राशि में डाका, अधिकारी मौन


कोरिया। बैकुण्ठपुर जनपद पंचायत क्षेत्र में प्रशासनिक अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नवंबर माह के प्रथम सप्ताह में कई ग्राम पंचायतों के ग्राम सचिवों का स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था, लेकिन लगभग दो माह बीत जाने के बाद भी अधिकांश पंचायतों में न तो नए सचिवों ने पदभार ग्रहण किया है और न ही पुराने सचिवों ने विधिवत प्रभार सौंपा है। यह स्थिति जिले में पहली बार देखने को मिल रही है, जब जिला प्रशासन के आदेशों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है।


इस लापरवाही का सीधा असर ग्राम पंचायतों के कार्यों पर पड़ रहा है। शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं, जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, पेंशन, मनरेगा, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड सुधार सहित अन्य आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। पंचायत कार्यालयों में ताले लटके होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में जब भी स्थानांतरण आदेश जारी किए गए, सभी कर्मचारियों ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण किया। लेकिन इस बार ग्राम पंचायत सचिवों द्वारा न केवल आदेशों की अनदेखी की जा रही है, बल्कि जनपद पंचायत स्तर पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। हैरानी की बात यह है कि अब तक ग्राम पंचायतों के बैंक खातों में नए सचिवों के हस्ताक्षर अथवा होल्ड चार्ज भी नहीं लगाए गए हैं।
नियम और धाराओं का उल्लंघन
छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (ग्राम पंचायत सचिव) नियम, 2011 के तहत स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद संबंधित कर्मचारी को 7 से 15 दिवस के भीतर नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य है। इस नियम का पालन न करना कदाचार (Misconduct) की श्रेणी में आता है।
इसके अतिरिक्त, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 की धारा 3 के अंतर्गत शासकीय आदेशों की अवहेलना को गंभीर अनुशासनहीनता माना गया है। इस पर विभागीय जांच, वेतन रोक, पदावनति, निलंबन अथवा सेवा से बर्खास्तगी तक का प्रावधान है।
इन स्पष्ट नियमों के बावजूद दो माह बीत जाने के बाद भी कई ग्राम पंचायतों में सचिवों का पदभार नहीं बदला जाना प्रशासनिक शिथिलता को दर्शाता है। सबसे गंभीर मामला ग्राम पंचायत तलवापारा का बताया जा रहा है, जहां लगभग दो माह से पंचायत कार्यालय बंद पड़ा है। यहां सचिव का स्थानांतरण हो चुका है, लेकिन नए सचिव ने पदभार ग्रहण नहीं किया, जबकि पूर्व सचिव भी पंचायत में बने रहने की बात कह रहे हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश
सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत तलवापारा सहित अन्य पंचायतों के पंचों और वार्डवासियों में भारी आक्रोश है। पंचायत कार्यालय बंद रहने से ग्रामीण मूलभूत कार्यों के लिए भटकने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शासन की योजनाएं कागजों में तो चल रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रशासन की चुप्पी से लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
संरक्षण और मिलीभगत के आरोप
सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि जिस सचिव का स्थानांतरण तलवापारा पंचायत में हुआ है, वह लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहकर अपना स्थानांतरण रुकवाने का प्रयास कर रहा है। वहीं, पूर्व सचिव भी उसी पंचायत में बने रहने की कोशिश में है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किन अधिकारियों के संरक्षण में ग्राम सचिव स्थानांतरण आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं।
15वें वित्त की राशि पर भी खतरा
सबसे गंभीर आरोप 15वें वित्त आयोग की राशि को लेकर लगाए जा रहे हैं। यह राशि ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों के लिए स्वीकृत की जाती है, लेकिन जिन सचिवों का स्थानांतरण हो चुका है, उनके द्वारा इन राशियों के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है। नियमों के अनुसार स्थानांतरण के तुरंत बाद ग्राम पंचायत के खातों में होल्ड लगाया जाना चाहिए, ताकि कोई वित्तीय अनियमितता न हो सके। लेकिन अब तक जनपद पंचायत अधिकारी द्वारा ऐसा नहीं किया गया है, जिससे उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि समय रहते जिला प्रशासन ने इस पूरे मामले पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता और बढ़ेगी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन कब संज्ञान लेता है और स्थानांतरण आदेशों की अवहेलना करने वाले ग्राम सचिवों तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कब तक नियमानुसार कार्रवाई करता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ