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एक साल में 48 हजार किमी चली सरकारी गाड़ी, कृषि महाविद्यालय के डीन पर दुरुपयोग के आरोप


बैकुण्ठपुर। कोरिया जिले के इंदिरा गांधी कृषि महाविद्यालय, जो वर्तमान में डॉ. रामचंद्र सिंह कृषि महाविद्यालय के नाम से संचालित हो रहा है, वहां पदस्थ डीन पर सरकारी वाहन के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। यह खुलासा सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से हुआ है, जिसने महाविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीन द्वारा उपयोग की जा रही सरकारी वाहन टाटा सूमो गोल्ड ने एक ही वर्ष में लगभग 48 हजार किलोमीटर की दूरी तय की है। यह आंकड़ा अपने आप में चौंकाने वाला है, क्योंकि औसतन यह प्रतिदिन 130 किलोमीटर से अधिक की यात्रा को दर्शाता है। दस्तावेजों में दर्ज लॉगबुक प्रविष्टियों के अनुसार, वाहन का उपयोग न केवल कार्यदिवसों में बल्कि शासकीय अवकाशों के दौरान भी लगभग प्रतिदिन किया गया। RTI दस्तावेजों में यह भी स्पष्ट रूप से दर्ज है कि वाहन की आवाजाही “डीन कक्ष” से दर्शाई गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वाहन का उपयोग व्यक्तिगत स्तर पर भी किया गया हो सकता है। नियमानुसार, सरकारी वाहन का उपयोग केवल शासकीय कार्यों के लिए ही किया जाना चाहिए, जबकि निजी उपयोग या अनावश्यक यात्राएं स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन मानी जाती हैं। मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब जानकारी प्राप्त करने के लिए पांच बार प्रयास के बाद डीन से मुलाकात होने पर उन्होंने RTI में सामने आए तथ्यों से साफ इनकार कर दिया। डीन का कहना है कि वे प्रतिदिन महाविद्यालय आते हैं और नियमित रूप से कार्यालयीन कार्यों में उपस्थित रहते हैं। उनके इस बयान के बाद अब सवाल यह उठता है कि क्या महाविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई आधिकारिक RTI जानकारी गलत है, या फिर डीन द्वारा वास्तविक स्थिति को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इस प्रकरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारों का कहना है कि यदि RTI में दी गई जानकारी सही है, तो यह सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का गंभीर मामला बनता है, जिसकी निष्पक्ष प्रशासनिक जांच आवश्यक है। वहीं, यदि जानकारी में त्रुटि है, तो संबंधित अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। फिलहाल यह मामला जांच की मांग के साथ प्रशासन के संज्ञान में लाने की तैयारी की जा रही है। अब देखना यह होगा कि उच्च शिक्षा विभाग और कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन इस पूरे प्रकरण पर क्या कार्रवाई करता है और सच्चाई कब सामने आती है।

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