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संलग्निकरण का खेल जारी, सोनहत तहसील में आदेश के बाद भी नहीं थम रही मनमानी

 


कोरिया। जिले में वर्षों से संलग्निकरण व्यवस्था का गलत लाभ उठाकर पदस्थापना और कार्यस्थलों में हेरफेर करने का खेल लगातार जारी है। सोनहत तहसील में इसका ताज़ा उदाहरण देखने को मिल रहा है, जहां लिपिक की पदस्थापना कलेक्टर कार्यालय में दर्शाई गई है, लेकिन वास्तविक कार्य वह सोनहत तहसील में ही कर रहा है। इस तरह के व्यवस्थागत खेल से शासकीय सेवा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि राज्य शासन ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा था कि 05 जून 2025 से सभी संलग्न सेवाएं स्वतः समाप्त मानी जाएंगी और संलग्न कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना वाले कार्यालय में ही कार्य करने भेजा जाएगा। आदेश के बाद भी कोरिया जिले में संलग्निकरण की व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। जिम्मेदार अधिकारी न तो शासन के आदेशों को लागू कर रहे हैं और न ही संलग्न कर्मचारियों की वापसी सुनिश्चित कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, संलग्निकरण की आड़ में कुछ अधिकारी और कर्मचारी मनपसंद स्थानों पर टिके रहने का लाभ उठा रहे हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। वहीं, वास्तविक पदस्थापना वाले कार्यालयों में कार्यभार बढ़ने और कार्य क्षमता में गिरावट जैसी समस्याएं भी उभर रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन के आदेशों की अवहेलना निरंतर बनी रही तो संलग्निकरण व्यवस्था पूरी तरह समाप्त करने का उद्देश्य विफल हो जाएगा और जिले में मनमानी पदस्थापनाओं का दौर थमता नजर नहीं आएगा। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कब तक संज्ञान लेकर शासन के आदेशों के अनुरूप सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करता है।

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