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सलका में संघ का शताब्दी उत्सव, 65 स्वयंसेवकों ने किया पथ संचलन

ध्वज प्रणाम, शस्त्र पूजन और प्रेरक उद्बोधन के साथ संपन्न हुआ विजयादशमी उत्सव




कोरिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में रविवार को सलका में भव्य विजयादशमी उत्सव एवं पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कुल 65 स्वयंसेवक अनुशासनबद्ध पंक्तियों में शामिल हुए। पथ संचलन खेल मैदान सलका से प्रारंभ होकर मुख्य बस्ती, चर्चपारा, डाइट मोहल्ला, कृषि उपज मंडी चौक, चिरमिरी रोड हनुमान मंदिर चौक होते हुए पुनः खेल मैदान में पहुंचकर संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत ध्वज प्रणाम और शस्त्र पूजन के साथ की गई। मुख्य वक्ता नरेश सोनी जी, जिला सह संघचालक कोरिया (छत्तीसगढ़) ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि विजयादशमी संघ का स्थापना दिवस है। सन् 1925 में डॉ. हेडगेवार ने महाराष्ट्र में संघ की स्थापना की थी। अब संघ अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और आज संघ का कार्य 100 से अधिक देशों में तथा प्रत्यक्ष रूप से 40 देशों में संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक होना गर्व की बात है, क्योंकि संघ का प्रत्येक कार्यकर्ता समाज के हर क्षेत्र में सेवा कार्यों से जुड़ा रहता है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत माता ने समय-समय पर अनेक संतों, महापुरुषों और वीरांगनाओं को जन्म दिया है। डॉ. हेडगेवार बचपन से ही देशभक्त थे और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्षरत रहे। संघ का इतिहास त्याग, तपस्या और संघर्ष से भरा हुआ है। उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ पर बल देते हुए कहा कि —

1. पर्यावरण संरक्षण,
2. छुआछूत का उन्मूलन,
3. भारतीय परंपराओं के अनुरूप उत्सव मनाना,
4. स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करना,
5. और बच्चों को अच्छे संस्कार देना — इन सबको जीवन में अपनाना चाहिए।

उन्होंने मातृशक्ति से भी आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को शाखा में भेजें ताकि वे अनुशासन और संस्कार सीख सकें। उन्होंने कहा कि संघ को केवल अखबारों या सोशल मीडिया से नहीं समझा जा सकता, बल्कि शाखा से जुड़कर ही उसके उद्देश्य को जाना जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कार कुर्रे ने की। इस अवसर पर खण्ड सह कार्यवाह सुरेंद्र कुमार, मंडल कार्यवाह हरिप्रसाद राजवाड़े, मंडल पालक एवं जिला महाविद्यालयीन छात्र कार्य प्रमुख प्रशांत राजवाड़े, जिला किसान कार्य प्रमुख राजेंद्र राजवाड़े, हितेश प्रताप सिंह सहित 65 स्वयंसेवक, गणमान्य नागरिक एवं मातृशक्ति उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में मुख्य शिक्षक सूरज कुमार, प्रार्थना प्रमुख अंकुश दास, सुभाषित रोशन विश्वकर्मा, अमृत वचन अश्विनी सिंह तथा एकल गीत प्रस्तुतकर्ता अंकुश सहित अन्य कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।

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