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जिला पंचायत के आदेश की खुलेआम अवहेलना, जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर के अधिकारी सवालों के घेरे में

कोरिया। जिला पंचायत कोरिया, बैकुण्ठपुर द्वारा 03 नवम्बर 2025 को जारी स्थानांतरण आदेशों का जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर स्तर पर खुलेआम पालन नहीं किया जा रहा है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा ग्राम पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट आदेश जारी किए गए थे, जिनमें सात दिवस के भीतर नवीन पदस्थापना स्थल पर पदभार ग्रहण करने का निर्देश था। इसके बावजूद कई सचिव न तो समय पर कार्यमुक्त हुए और न ही नवीन ग्राम पंचायतों में पदभार ग्रहण किया गया। सबसे गंभीर मामला ग्राम पंचायत सचिव गणेश राजवाडे से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, गणेश राजवाडे का स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद लगभग 90 दिन से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी वे न तो पूर्ण रूप से कार्यमुक्त किए गए और न ही नियमों के अनुसार नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार संभाला। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर के अधिकारी गणेश राजवाडे को क्यों बचा रहे हैं और जिला पंचायत के आदेशों को लागू करने में क्यों टालमटोल कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर में पदस्थ प्रभारी अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। आरोप है कि कुछ ग्राम पंचायत सचिवों द्वारा पंचायत स्तर पर लगातार भ्रष्टाचार किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें एकतरफा रूप से भारमुक्त नहीं किया जा रहा। आदेश के सात दिनों के भीतर पदभार ग्रहण करने का प्रावधान होने के बावजूद, महीनों तक सचिवों का पुराने पंचायतों में बने रहना कई सवाल खड़े करता है। सूत्रों का कहना है कि स्थानांतरण के बाद भी संबंधित सचिवों द्वारा वित्तीय लेन-देन और प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप किया जा रहा है, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। इसके बाद भी जनपद पंचायत स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई न होना, प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है। जिले के जागरूक नागरिकों और पंचायत प्रतिनिधियों में इस पूरे मामले को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि जिला पंचायत के आदेशों का इस तरह उल्लंघन होता रहा, तो शासन-प्रशासन की साख पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगेंगे। अब देखना यह है कि जिला पंचायत कोरिया इस मामले में सख्त रुख अपनाकर जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

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