कोरिया जिले के जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कटकोना में पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत कटकोना में पदस्थ ग्राम सचिव गणेश राजवाड़े का स्थानांतरण आदेश दिनांक 03 नवम्बर 2025 को जारी किया गया था, लेकिन तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्होंने नवीन ग्राम पंचायत में पदभार ग्रहण नहीं किया।
सूत्रों के अनुसार जिला पंचायत कार्यालय में डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में चार वर्षों से कार्यरत हैं और वहीं लिपिक की भूमिका में बैठे हुए हैं। चर्चा है कि लगभग 80 हजार रुपये की कथित डील के बाद ही स्थानांतरण आदेश का पालन नहीं किया गया। यह स्थिति जिला पंचायत व जनपद पंचायत अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। इतना ही नहीं, कटकोना में भेजे गए नए ग्राम सचिव के साथ भी अमर्यादित व्यवहार का आरोप है। बताया जा रहा है कि गणेश राजवाड़े ने शराब के नशे में धुत होकर नए सचिव के साथ गाली-गलौज की। बावजूद इसके जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
सबसे गंभीर मामला 15वें वित्त आयोग की राशि से जुड़ा है। आरोप है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी गणेश राजवाड़े ने ग्राम पंचायत कटकोना के खाते से 23 चेक जारी किए। ये भुगतान ऐसे लोगों को किए गए जिनके पास जीएसटी नंबर तक नहीं था। लगभग 50 हैंडपंप मशीनों की खरीदी कागजों में दर्शाई गई, लेकिन पुराने हैंडपंप कहां गए, इसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। अनुमान है कि इस पूरे मामले में लगभग 9 लाख रुपये का गबन किया गया।
नियम व धारा क्या कहते हैं?
🔹 छत्तीसगढ़ पंचायत लेखा नियम 2011 एवं
🔹 छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 के प्रावधानों के अनुसार
स्थानांतरण आदेश जारी होने की तिथि से संबंधित कर्मचारी के सभी वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
स्थानांतरित कर्मचारी पंचायत के बैंक खाते से किसी भी प्रकार का लेन-देन, चेक जारी या राशि आहरण नहीं कर सकता। यह कृत्य छत्तीसगढ़ वित्तीय संहिता (Financial Code) के अंतर्गत गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। स्थानांतरण के बाद राशि निकालना कर्तव्य में घोर लापरवाही, आर्थिक अपराध एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अंतर्गत दंडनीय अपराध माना जाता है।
जनपद पंचायत अधिकारी की जिम्मेदारी
नियमों के अनुसार जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी है कि—
तत्काल जांच समिति गठित की जाए
पंचायत खाते से हुए लेन-देन पर बैंक स्टेटमेंट तलब किए जाएं
अवैध रूप से निकाली गई राशि की रिकवरी कराई जाए
दोषी पाए जाने पर संबंधित सचिव के विरुद्ध निलंबन, एफआईआर एवं विभागीय कार्रवाई की जाए। कटकोना का यह मामला स्पष्ट करता है कि नियम-कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण पर कब तक और क्या ठोस कार्रवाई करता है।

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