कोरिया। जिला एवं सत्र न्यायालय बैकुंठपुर में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेश कुमार तिवारी की अध्यक्षता में वर्ष 2025 की चौथी एवं साल की अंतिम नेशनल लोक अदालत का आयोजन 13 दिसंबर 2025 को गरिमामय वातावरण में किया गया। इस लोक अदालत ने न केवल लंबित मामलों के त्वरित निपटारे का मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि न्याय को सरल, सुलभ और मानवीय स्वरूप देने का उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत किया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेश कुमार तिवारी के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस नेशनल लोक अदालत में जिले के विभिन्न बैंक प्रतिनिधि, बीमा कंपनियों के अधिकारी, विद्युत विभाग, नगर पालिका, टेलीकॉम विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। अलग-अलग खंडपीठों में मामलों की सुनवाई की गई, जहां न्यायालय की उपस्थिति में दोनों पक्षकारों के बीच आपसी सहमति से अनेक विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान कराया गया। जिला एवं सत्र न्यायालय बैकुंठपुर में आयोजित इस नेशनल लोक अदालत के अंतर्गत सिविल न्यायालय एवं राजस्व न्यायालय की कुल 44 खंडपीठों में मामलों की सुनवाई हुई। इनमें सिविल न्यायालय की 15 खंडपीठ तथा राजस्व न्यायालय की 28 खंडपीठ शामिल रहीं। इन खंडपीठों के माध्यम से कुल 17,541 मामलों की सुनवाई की गई, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेश कुमार तिवारी ने लोक अदालत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “लोक अदालत की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसमें दोनों पक्षों का आपसी विवाद तो समाप्त हो जाता है, लेकिन उनके आपसी संबंध खराब नहीं होते। यह न्याय का ऐसा मंच है, जहां सुलह और समझौते के माध्यम से स्थायी समाधान निकलता है। उन्होंने यह भी बताया कि सभी 17,541 मामलों की सुनवाई कर ली जाएगी और न्यायालय पर लंबित मामलों का बोझ कम करने में लोक अदालत की महत्वपूर्ण भूमिका है। न्यायमूर्ति शैलेश कुमार तिवारी ने न्यायालय में लंबित मामलों से जूझ रहे नागरिकों से अपील की कि वे लोक अदालत के माध्यम से अपने विवादों का शीघ्र, सरल और कम खर्च में निपटारा कराएं। उनके नेतृत्व में आयोजित यह नेशनल लोक अदालत न केवल न्यायिक दक्षता का उदाहरण बनी, बल्कि आम जनता के न्याय व्यवस्था पर विश्वास को और अधिक मजबूत करने में भी सफल रही। कुल मिलाकर, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेश कुमार तिवारी के मार्गदर्शन में आयोजित यह नेशनल लोक अदालत जिले के लिए एक सराहनीय और ऐतिहासिक आयोजन साबित हुई, जिसने न्याय के मानवीय चेहरे को सशक्त रूप से सामने रखा।

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