Ticker

6/recent/ticker-posts

समिति प्रबंधकों की हड़ताल टूटी, किसानों को परेशान करने वाले गुर्गों के कारण बढ़ा अविश्वास

 


कोरिया। जिले में धान खरीदी के बीच समिति प्रबंधकों की हड़ताल आखिरकार टूट गई है। बुधवार 26 नवम्बर 2025 को सभी समिति प्रबंधकों ने अपने-अपने केंद्रों में पदभार ग्रहण कर लिया। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब अंततः उन्हें वापस काम पर लौटना ही था, तो फिर हड़ताल का नाटक क्यों किया गया? सूत्रों की मानें तो समिति प्रबंधकों के गुर्गों द्वारा किसानों को लगातार परेशान किया जाना और उनसे अवैध वसूली किए जाने की शिकायतें लंबे समय से चली आ रही हैं। यह हड़ताल भी इसी दबाव राजनीति का हिस्सा मानी जा रही है। किसानों का आरोप है कि सबसे अधिक अनियमितताएं धौराटीकरा समिति में देखने को मिलती हैं। तौल, बारदाना, वजन में कटौती और परिवहन शुल्क के नाम पर वसूली आम बात बन चुकी है। इसी अव्यवस्था को रोकने के लिए कलेक्टर कोरिया ने धान खरीदी शुरू होने से पहले ही सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर दी थीं, जिससे 15 नवम्बर से खरीदी बिना किसी बाधा के प्रारम्भ हो गई। प्रशासन द्वारा साफ निर्देश दिए गए थे कि किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी। जब कलेक्टर के निर्देशों के बाद खरीदी पूरी तरह सुचारू रूप से शुरू हो चुकी थी, तब समिति प्रबंधकों में खलबली मच गई। बुधवार को कलेक्टर की बैठक में स्पष्ट निर्देशों के बाद सभी प्रबंधक हड़ताल से वापस हुए और पदभार ग्रहण किया।


इसी बीच जामपारा धान खरीदी केंद्र का मामला भी चर्चा में है। यहाँ भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच दीपेश साहू, जो सूरजपुर जिले के निवासी हैं, की नियुक्ति पर सवाल उठ रहे हैं। सहकारी समितियों के संचालन नियमों के अनुसार बाहरी जिले के कर्मचारी को ऐसे संवेदनशील पद पर रखना नियमों के विरुद्ध माना जाता है। इससे यह आशंका भी गहराई है कि अधिकारियों को गुमराह किया गया है या नियमों को नजरअंदाज करके पदस्थापना की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस कर्मचारी पर पूर्व में भ्रष्टाचार या गबन जैसी शिकायतें हों, उसे दोबारा जिम्मेदारी देना नियमों के खिलाफ है। किसानों का भी यही कहना है कि अवैध वसूली और दबंगई करने वाले गुर्गों से उन्हें राहत मिले और खरीदी निष्पक्ष तरीके से हो। कुल मिलाकर हड़ताल खत्म होने से खरीदी प्रक्रिया पटरी पर आ गई है, लेकिन किसानों को परेशान करने वाले गुर्गों और जामपारा केंद्र की नियुक्ति पर उठे सवालों की जांच की आवश्यकता अब और बढ़ गई है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ