कोरिया। शारदीय नवरात्रि एवं दशहरा के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकसित भारत की दिशा में अग्रसर है। मोदी जी के मार्गदर्शन में जीएसटी सुधार, आयकर में सरलीकरण और आत्मनिर्भर भारत अभियान जैसे ऐतिहासिक कदमों से देश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों को राहत, व्यापार में सुगमता और कर कानूनों को सरल बनाना है, जिससे देश के 150 करोड़ नागरिकों का जीवन आसान और समृद्ध हो सके। वक्ताओं ने कहा कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के कठिन समय में भी प्रधानमंत्री मोदी ने “आत्मनिर्भर भारत” का मंत्र देकर पूरे देश को आत्मविश्वास से भर दिया। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि देशभक्ति की भावना और स्वदेशी चेतना का प्रतीक है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए भारतीय जनता पार्टी द्वारा आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान शुरू किया गया है, जो 25 सितंबर (पं. दीनदयाल उपाध्याय जयंती) से प्रारंभ होकर 25 दिसंबर (भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जयंती) तक चलेगा। इस अभियान का उद्देश्य हर घर में स्वदेशी उत्पादों के प्रयोग को बढ़ावा देना और “वोकल फॉर लोकल” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। इसके अंतर्गत रैलियां, संकल्प सम्मेलन, पदयात्राएं और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि भारत की समृद्ध परंपरा, संस्कृति और संसाधन ही उसकी वास्तविक शक्ति हैं। छत्तीसगढ़ इस अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। राज्य के बस्तर की लोककला, चांपा का कोसा, जशपुर की कॉफी और महिलाओं के स्वसहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पाद अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। इन उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार कार्य कर रही है। बस्तर आर्ट, डोकरा, टेराकोटा जैसी कलाएं भारत की सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी हैं। वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आर्थिक और नीतिगत सुधारों का जो दौर चल रहा है, उसका सबसे अधिक लाभ गरीब, किसान, महिलाओं और मध्यम वर्ग को मिला है। उन्होंने अपील की कि आगामी त्योहारों — नवरात्रि, दशहरा, दीपावली के अवसर पर सभी लोग स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता दें। स्वदेशी अपनाना न केवल देशभक्ति का प्रतीक है, बल्कि विकसित भारत और सशक्त छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम भी है। सभी नागरिकों से आह्वान किया गया कि वे गर्व से कहें — “मैं स्वदेशी खरीदता हूँ, स्वदेशी बेचता हूँ”, क्योंकि यही भावनाएं आत्मनिर्भर भारत के सच्चे संकल्प को साकार करेंगी।

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