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कांकेर में वन अधिकार पट्टा घोटाला उजागर, तीन गिरफ्तार – फर्जी दस्तावेजों से शासन को 5 लाख से अधिक का नुकसान

 


कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में वन अधिकार पट्टों में धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले के चारामा क्षेत्र में पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वन अधिकार मान्यता पत्र (Forest Rights Patta) प्राप्त करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने कूटरचित कागजातों का सहारा लेकर शासन को लगभग 5 लाख 17 हजार 773 रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाया है।


यह मामला ग्राम मयाना के ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायत के बाद उजागर हुआ। ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (SDM), चारामा को दी गई शिकायत में बताया था कि ग्राम पंचायत मयाना में कुछ लोगों ने शासकीय भूमि पर अवैध रूप से वन अधिकार पट्टे हासिल कर लिए हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि इन पट्टों को पाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और सरकारी अधिकारियों को गुमराह कर भूमि का दुरुपयोग किया गया।



शिकायत के बाद एसडीएम कार्यालय ने प्रशासनिक जांच शुरू की, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि ग्राम मयाना निवासी जीवन ठाकुर और उसके साथियों ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से वन अधिकार मान्यता पत्र बनवाए थे। जांच रिपोर्ट थाना चारामा को भेजी गई, जिसके बाद अपराध क्रमांक 123/25 दर्ज कर पुलिस ने विवेचना प्रारंभ की। पुलिस जांच में यह प्रमाणित हुआ कि आरोपियों ने राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर शासकीय भूमि का पट्टा अपने नाम पर तैयार करवाया था। उन्होंने वन विभाग और राजस्व कार्यालय को झूठी जानकारी देकर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया और वास्तविक लाभार्थियों के अधिकारों को प्रभावित किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए चारामा थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तीनों आरोपियों —जीवन ठाकुर (49 वर्ष, पिता रामदयाल), शोप सिंह (60 वर्ष, पिता शिव प्रसाद) और नीरज कुमार पोया (23 वर्ष, पिता जीवन) — सभी निवासी ग्राम मयाना, थाना चारामा, जिला कांकेर को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी चारामा निरीक्षक तेज वर्मा, उपनिरीक्षक रनेश सेठिया, सहायक उपनिरीक्षक भकेश पटेल, तथा आरक्षक अनिल जैन और जितेंद्र नाग शामिल रहे। पुलिस का कहना है कि ऐसे फर्जीवाड़े करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस प्रकरण में किसी शासकीय कर्मचारी की संलिप्तता तो नहीं है। वहीं, स्थानीय प्रशासन ने इस घटना को गंभीर मानते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पट्टा वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटाइज्ड किया जाएगा। इसके साथ ही राजस्व विभाग और वन विभाग के बीच डेटा मिलान प्रणाली को भी सशक्त किया जाएगा ताकि कोई भी व्यक्ति जाली दस्तावेजों के जरिए सरकारी लाभ प्राप्त न कर सके।

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